नासिक धर्मांतरण मामले में बड़ा राजनीतिक घमासान; सिंडिकेट एंगल की जांच की मांग तेज, SIT जांच में नए खुलासों से बढ़ा विवाद

नासिक धर्मांतरण मामले को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इस पूरे प्रकरण में कई गंभीर आरोप सामने आने के बाद जांच एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं। वहीं, नेताओं की ओर से मामले की निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग उठ रही है।

Nashik TCS Case: नासिक धर्मांतरण मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। शिवसेना के संजय निरुपम ने आरोप लगाया है कि इस पूरे प्रकरण में एक संगठित नेटवर्क (सिंडिकेट) की भूमिका हो सकती है और इसकी जांच सभी एंगल से होनी चाहिए। जानकारी के अनुसार, 25 मार्च को टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) से जुड़ी कुछ महिलाओं ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उनके साथ शोषण हुआ और धर्मांतरण के लिए दबाव बनाया गया। इसके बाद SIT ने जांच करते हुए मामले में 5 चार्जशीट दाखिल की हैं और 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिन्हें अभी तक जमानत नहीं मिली है।

Sanjay Nirupam

नासिक धर्मांतरण मामले में संजय निरुपम का बयान (फोटो- PTI)

बुर्का पहनने का दबाव

पीड़िताओं के बयान के मुताबिक, उन पर एक पाकिस्तानी यूट्यूबर के वीडियो देखने और बुर्का पहनने का दबाव बनाया गया था। जांच में यह भी दावा किया गया है कि कुछ मोबाइल फोन से कई वीडियो बरामद हुए हैं। इसी बीच, आरोपी निदा खान को लेकर भी चर्चा है, जो पहले फरार बताई जा रही थी और बाद में मतीन के घर से मिली। बताया जा रहा है कि उसने यह स्वीकार किया है कि वह नमाज पढ़ना सिखाती थी।

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