Bihar Assembly Elections 2025: बिहार में इस साल के अंत तक विधानसभा चुनाव होने वाला है। इससे पहले राजद नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने चुनाव आयोग पर लोकतंत्र और संविधान के साथ खिलवाड़ करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में उनका प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग के साथ मुलाकात करेगा।
राजद नेता तेजस्वी यादव (फोटो साभार: @INCIndia)
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने अचानक से विशेष गहन पुनरीक्षण की घोषणा की है। इसका यह मतलब है कि फरवरी माह में जो घटाव-जुड़ाव के बाद वोटर लिस्ट पब्लिश हुई थी। उन 8 करोड़ बिहारियों की वोटर लिस्ट को नकार दिया गया है और अब नए सिरे से वोटर्स बनाए जाएंगे।
क्या कुछ बोले तेजस्वी यादव?
तेजस्वी यादव ने कहा कि चुनाव से ठीक दो माह पहले आप ये काम क्यों कर रहे हैं और क्या यह मुमकिन है कि आप 8 करोड़ लोगों को 25 दिन के अंदर वोटर बना लें, घर-घर जाएं। सिर्फ इतना ही नहीं, ऐसे-ऐसे कागज मांगे गए हैं, जो गरीबों के पास होंगे ही नहीं।
पीएम मोदी और नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि स्पष्ट है कि दोनों डरे हुए हैं, बिहार में होने वाली हार को देखते हुए नीतीश जी दिल्ली जाते हैं। वो चाहते हैं कि गरीबों का वोटर लिस्ट से नाम कट जाए। लोकतंत्र में गरीबों को सबसे महत्वपूर्ण अधिकर वोट का मिला है, उसे नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार वंचित, शोषित समाज से छीनना चाहते हैं।
तेजस्वी यादव ने चुनाव आयोग से सवाल किया कि 22 साल बाद विशेष गहन पुनरीक्षण जैसी बड़ी एक्सरसाइज की जरूरत क्यों पड़ी? क्या गिनती के दिनों में यह करना मुमकिन है? 22 साल पहले विशेष गहन पुनरीक्षण में 2 साल लगे थे। ऐसे में क्या गिनती के दिनों में ये करना संभव है?
तेजस्वी ने पूछे कई सवाल
- बिहार में अभी मानसून का समय है। बिहार का 73 फीसदी भाग बाढ़ से प्रभावित रहता है। ऐसे में लोग अपनी जान बचाएंगे या चुनाव आयोग को कागज ढूंढकर देंगे।
- 90 फीसदी से अधिक DEO, ERO हैं, उनके पास 2003 की मतदाता सूची भी उपलब्ध नहीं होगी, जिसके आधार पर वो ये कार्य करेंगे।
- संविधान और लोकतंत्र विरोधी भाजपा-जदयू गरीबों और वंचितों का नाम पहले मतदाता सूची से काटेंगे, गरीबों का राशन बंद करेंगे, पेंशन बंद करेंगे, SC/ST वर्ग के छात्रों की छात्रवृत्ति बंद करेंगे। इनका यही एजेंडा है।
- जब 2024 लोकसभा चुनाव इसी मतदाता सूची पर हुए थे तो बिहार का चुनाव क्यों नहीं हो सकता है? क्या इससे उसी मतदाता सूची पर बनी हुई सरकार की वैधता पर सवाल नहीं उठता है।
- बिहार में 8 करोड़ मतदाता हैं, जिसमें से 59 फीसदी आबादी 40 साल या उससे कम आयु वर्ग की है, यानि 4 करोड़ 76 लाख लोग निर्वाचन आयोग के निर्देश पर 1 जुलाई से 31 जुलाई 2025 के बीच अपनी नागरिकता को साबित करेंगे। जिसमें आधार कार्ड मान्य नहीं होगा।
