पटना में रंगीन मछलियों का पालन सजावट और व्यवसाय के लिए लोकप्रिय हो रहा है। एक्वेरियम में ये मछलियां वेटिंग हॉल, होटल, अस्पताल और पर्यटक स्थलों पर देखी जाती हैं। लोग बड़े पैमाने पर मछलियों का पालन कर अच्छी आमदनी कमा रहे हैं। रंगीन मछलियों की मांग बाजार में लगातार बढ़ रही है। पालन करना आसान और कम खर्चीला है। सजावट के लिए छोटे एक्वेरियम का उपयोग किया जा सकता है। व्यावसायिक स्तर पर बड़े तालाब या मछली घर की आवश्यकता होती है।
(सांकेतिक फोटो)
बिहार सरकार मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी प्रदान करती है। एक एकड़ के तालाब से सालाना 5 से 8 लाख रुपये की कमाई संभव है। पीएम मत्स्य संपदा योजना के तहत तीन इकाइयों में आवेदन किया जा सकता है। लघु आकार के यूनिट्स में 1200 स्क्वायर फीट में काम शुरू किया जा सकता है। सामान्य वर्ग को 40% और विशेष वर्गों को 60% तक का अनुदान मिलता है। पालकों को ट्रेनिंग भी दी जाती है।
- मछलियों की प्रजातियाँ: कार्प, पोयसिलिया, सिचलिड, वायु श्वासी मछलियां।
- एक्वेरियम का आकार: 60x30x38 से.मी. आदर्श माना जाता है।
- मछली घर को अप्रत्यक्ष सूर्य प्रकाश में स्थापित करें।
- जल का तापमान 22 से 30 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए।
- जल की सफाई हर 15 दिन में करनी चाहिए।
- बीमार मछलियों की पहचान: आहार में रुचि न लेना, सुस्त होना, आदि।
