बिहार के छपरा शराब कांड के बाद बीजेपी समेत लोजपा (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान नीतीश सरकार को घेरने में लगे हैं। इसी बीच बिहार के भभुआ की एक विशेष अदालत ने मंगलवार को राजस्थान के एक तस्कर को बिहार में शराब सप्लाई करने आरोप में 10 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। दोषी राजस्थान के सीकर जिले के रहने वाले दिनेश कुमार है। जिसे बिहार की दुर्गावती पुलिस ने इस साल 7 सितंबर को बिहार-उत्तर प्रदेश की सीमा पर 5,787 लीटर भारतीय निर्मित विदेशी शराब (आईएमएफएल) के परिवहन के आरोप में गिरफ्तार किया था।
बिहार में राजस्थान के शराब तस्कर को जेल
एचटी की रिपोर्ट के मुताबिक दिनेश कुमार गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने जांच पूरी की और 7 नवंबर को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे) सुनील कुमार चौबे की विशेष आबकारी अदालत में चार्जशीट दायर की गई और त्वरित सुनवाई की सिफारिश की। आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए गए और 15 नवंबर 2022 को मुकदमा शुरू हुआ। अभियोजन पक्ष के कम से कम 6 गवाहों की जांच के बाद अदालत ने दिनेश कुमार को बिहार निषेध और आबकारी अधिनियम की धारा 30A के तहत शराब के अवैध परिवहन और वितरण का दोषी पाया, (धारा 30A आजीवन कारावास की अधिकतम सजा का प्रावधान करती है)। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा शराब की बिक्री और खपत पर प्रतिबंध लगाने के बाद 2016 से बिहार एक ड्राई राज्य है। यानी यहां शराब बनाना, खरीदना, बेचना और पीना मना है।
हाल ही में बिहार के छपरा में जहरीली शराब पीने से करीब 70 लोगों की जान चली गईं। इस पर सियासत भी जमकर हो रही है। इस ट्रेजडी पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा था पियोगे तो मरोगे। बीजेपी अलावा लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के नेता चिराग पासवान भी नीतीश कुमार को लगातार निशाने पर ले रहे हैं। उन्होंने इस मुद्दे को लोकसभा में उठाया और कहा कि मैं अपने प्रदेश बिहार को बचाने की गुहार लेकर इस सदन में आया हूं। जहरीली शराब के चलते एक के बाद एक मौत से बिहार में हत्याओं की एक सीरीज शुरू हो गई है। लेकिन इसके बावजूद महागठबंधन के नेता इस विषय पर खामोश हैं क्योंकि इसमें वो भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि मैं मांग करता हूं कि केंद्र सरकार इस मामले में स्वत: संज्ञान ले और राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाए।
