भारत में मंदिरों की कमी नहीं है। यहां एक से बढ़कर एक अनोखे मंदिर मौजूद हैं। कोई मंदिर अपने स्थान विशेष के लिए प्रसिद्ध होता है, तो कोई अपने महत्व के लिए जाना जाता है। कहा जाता है कि भगवान राम जब धरती लोक छोड़कर चले गए, तो उन्होंने पृथ्वी लोक पर धर्म की रक्षा के लिए बजरंगबली को कार्यभार सौंपा था।
मनोकामना मंदिर, दरभंगा।
दरभंगा में स्थित है मनोकामना मंदिर
आज हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जो अपने अनोखे अंदाज और अजब-गजब परंपरा के लिए जाना जाता है। यह मंदिर बिहार के दरभंगा जिला में स्थित है। दरभंगा राज कैंपस में स्थित मनोकामना मंदिर अपने अनूठे नियम निष्ठा के लिए क्षेत्र में मशहूर तो है ही, साथ ही यह माना जाता है कि यहां कोई भी मनोकामना अधूरी नहीं रहती। यानी कि आप जो कुछ भी मांगते हैं, यहां स्थित बजरंगबली उसे पूरा करते हैं।
ये भी पढ़ेंः भारतीय सरजमीं पर होते हुए भी इस मंदिर पर है विदेशी सरकार का अधिकार, कारण जान हो जाएंगे हैरान
दीवार पर लिखी जाती हैं मुरादें
अमूमन देखा जाता है कि बजरंगबली को चढ़ाने के लिए लोग लाल सिंदूर या लाल ध्वज लाते हैं, लेकिन दरभंगा स्थित मनोकामना मंदिर में कुछ अलग परंपरा है। यहां आने वाले भक्त अपनी मनोकामना मंदिर की दीवार पर लिख देते हैं और उसकी मनोकामना पूरी हो जाती है। कहा जाता है कि जब भी किसी को कुछ मांगना होता है तो लोग यहां आकर बजरंगबली को लड्डू का भोग लगाते हैं और पेंसिल या पेन से संगमरमर की दीवार पर अपनी मनोकामना लिख देते हैं।
मंदिर में भक्त नहीं कर सकते हैं प्रवेश
इस मंदिर की एक खास बात यह है कि इसके अंदर कोई भी भक्त प्रवेश नहीं कर सकते हैं। अब सोचिए कि यह कैसे हो सकता है कि मंदिर में कोई भक्त प्रवेश ही न करें। इसके पीछे का कारण यह है कि यह मंदिर काफी छोटा है। करीब सात फीट इसकी ऊंचाई है, जिस वजह से मंदिर के अंदर केवल पुजारी है बैठते हैं और भक्त बाहर से ही पूजा-पाठ करते हैं।
दरभंगा के राजा ने करवाया था निर्माण
कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण दरभंगा के महाराजा रामेश्वर सिंह ने करवाया था। उन्होंने अपने किसी रिश्तेदार के लिए यह मंदिर बनवाया था, जिसका कद छोटा था और इसी वजह से इस मंदिर की ऊंचाई केवल सात फीट है। यहां आप जब भी आएंगे तो आपको दीवार पर लिखी गई मनोकामना दिख जाएंगी।
