बिहार में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनाव तारीखों की घोषणा भी सितंबर या अक्टूबर में हो सकती है। इससे पहले निर्वाचन आयोग द्वारा शुरू किए गए विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण (SIR) पर विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। विपक्ष ने इस प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ियों का आरोप लगाते हुए इसे सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा दिया है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट से भी SIR पर रोक लगाने की बात नहीं कही गई है।
जिंदा व्यक्ति को मृत बताकर मतदाता सूची से नाम काटा (फोटो - SCI.GOV)
इधर बिहार में भोजपुर जिले के आरा विधानसभा क्षेत्र के मतदाता मिंटू पासवान ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। उनका कहना है कि उन्हें मतदाता सूची में गलत तरीके से मृत घोषित करके उनका नाम सूची से हटा दिया गया। 41 वर्षीय मिंटू का आरोप है कि रिव्यू के दौरान बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) उनके घर सत्यापन के लिए नहीं आए। शिकायत करने पर BLO ने 10 दिन बाद संपर्क किया और नाम जोड़ने के लिए कई दस्तावेज मांगे।
मिंटू के साथ-साथ उनके वार्ड के कई अन्य जिंदा लोगों को भी मृत घोषित कर उनके नाम हटाए गए हैं। इनमें 69 वर्षीय फुलझारो देवी, 64 वर्षीय शंकर चौहान, 73 वर्षीय मदन चौहान और 34 वर्षीय सुधा देवी शामिल हैं। सभी पीड़ितों ने दावा-आपत्ति दर्ज कर ली गई है। यह मामला मतदाता पुनरीक्षण प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गहरे सवाल खड़े कर रहा है, जिससे विपक्ष के संदेह को और बढ़ावा मिल रहा है।
