बिहार के पटना जिले में मतदाता पहचान पत्र के लिए दस्तावेजों का सत्यापन करने की प्रक्रिया जोर-शोर से जारी है। जिलाधिकारी डॉ. त्यागराजन एसएम ने इस अभियान के तहत मतदाताओं को चेतावनी दी है कि यदि वे 26 जुलाई तक अपने दस्तावेजों का सत्यापन नहीं कराते हैं, तो उनका नाम मतदाता सूची से हटा दिया जाएगा। यह कदम भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशों के अनुसार उठाया जा रहा है ताकि मतदाता सूची को अद्यतन और शुद्ध रखा जा सके।
प्रतीकात्मक फोटो
सत्यापन अभियान का महत्व और प्रक्रिया
यह विशेष पुनरीक्षण कार्यक्रम इसलिए चलाया जा रहा है क्योंकि पटना जिले में कई मतदाताओं की मृत्यु हो गई है, वहीं कुछ लोग अपने विधानसभा क्षेत्र छोड़कर कहीं और चले गए हैं। ऐसे में मतदाता सूची को वास्तविक और वर्तमान स्थिति के अनुरूप बनाना आवश्यक हो गया है। इस अभियान के तहत लगभग 5,000 बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) घर-घर जाकर दस्तावेजों का सत्यापन कर रहे हैं।
मतदाता पहचान पत्र के लिए कुल 11 प्रकार के दस्तावेज मान्य माने गए हैं, जिनमें शामिल हैं:
- सरकारी कर्मचारियों का पहचान पत्र
- जन्म प्रमाण पत्र
- शैक्षिक प्रमाण पत्र
- स्थाई निवास प्रमाण पत्र
- जाति प्रमाण पत्र
- आधार कार्ड, पैनकार्ड, राशन कार्ड, मनरेगा जॉब कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस जैसे दस्तावेज़ इस सूची में शामिल नहीं हैं।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि केवल इन मान्यता प्राप्त दस्तावेजों को ही सत्यापन के लिए स्वीकार किया जाएगा। यदि कोई मतदाता समय सीमा के भीतर दस्तावेजों का सत्यापन नहीं कराता है, तो उसे अपना नाम पुनः मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए फॉर्म 6 ऑनलाइन या ऑफलाइन भरना होगा।
पटना जिले में मतदाता संख्या और संपर्क व्यवस्था
पटना जिले में कुल मतदाताओं की संख्या 50,31,930 है। इस विशाल संख्या को देखते हुए सत्यापन प्रक्रिया का समुचित संचालन सुनिश्चित करने के लिए जिला संपर्क केंद्र स्थापित किया गया है। इस केंद्र के लिए 14 कर्मियों की टीम गठित की गई है, जो सोमवार से नियमित रूप से कार्यरत है।
मतदाता इस केंद्र से मतदाता सूची, दस्तावेजों के सत्यापन या किसी भी शिकायत के संबंध में संपर्क कर सकते हैं।
