राजनीतिक विश्लेषक प्रशांत किशोर (पीके) ने बिहार के डिप्टी-सीएम तेजस्वी यादव पर बड़ा कटाक्ष किया है। उन्होंने मंगलवार (25 अप्रैल, 2023) को कहा है कि लालू यादव के छोटे लाल (बेटे) ने 10 लाख नौकरियां देने का वादा किया था, मगर असल बात यह है कि अगर वह राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के संस्थापक (लालू) के पुत्र न होते तो उन्हें खुद नौकरी भी नहीं मिलती।
चुनाव विश्लेषक प्रशांत किशोर और बिहार के डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव। (फाइल)
जन सुराज यात्रा के बीच पीके ने बताया, ''यादव ने पहली कैबिनेट बैठक में ही 10 लाख नौकरियां देने की बात की थी...सब जानते हैं कि वह 10 लाख नौकरियां नहीं दे सकते हैं। अगर वह लालू के बेटे नहीं होते तो उन्हें नौकरी तक नहीं मिलती। ऐसे में वह दूसरों को नौकरी कैसे दे सकते हैं? तेजस्वी लालू के बेटे न होते तो उन्हें देश में क्या नौकरी मिलती?" उन्होंने इसके साथ ही मांग की कि रोजगार देने से जुड़े इस झूठ को लेकर तेजस्वी को माफी मांगनी चाहिए।
इतना ही नहीं, किशोर ने आगे बिहार सीएम और उनकी सरकार का जिक्र करते हुए कहा- नीतीश कुमार की "लंगड़ी सरकार" है और उन्हें अपने सूबे की चिंता करनी चाहिए। जिस पार्टी का एक भी सांसद नहीं है, वह देश का पीएम तय कर रही है। उनकी पार्टी की कोई पकड़ नहीं है और अब वह अन्य पार्टियों को एकजुट करने की कोशिश (2024 के चुनाव के लिए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कई विपक्षी नेताओं से मिलने पर) कर रहे हैं।
दरअसल, पीके के इस बयान से ठीक एक रोज पहले यानी सोमवार को नीतीश ने कहा कि अगले आम चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को सत्ता से हटाने के लिए अधिक से अधिक विपक्षी दलों को एकजुट करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया था कि देश के इतिहास को बदलने का प्रयास किया जा रहा है। मौजूदा सरकार की ओर से कोई कल्याणकारी कार्य नहीं किया जा रहा है, और वह केवल "प्रचार-प्रसार" पर निर्भर है। (पीटीआई-एएनआई इनपुट्स के साथ)
