Rajaswa Maha Abhiyan 2025: राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने राजस्व महा-अभियान को और अधिक प्रभावशाली बनाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। विभाग ने सभी जिला समाहर्ताओं को निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि अब किसी भी हलके (पंचायत) में जरूरत पड़ने पर दो से अधिक अतिरिक्त शिविर लगाए जा सकते हैं। विभाग के सचिव जय सिंह द्वारा भेजे गए पत्र में बताया गया कि प्रगति समीक्षा के दौरान यह पाया गया कि कई हलकों में केवल दो शिविरों के माध्यम से सभी आवेदकों की समस्याओं का समाधान संभव नहीं हो पा रहा है। ऐसी स्थिति में स्थानीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए अंचल अधिकारी अपने स्तर पर अतिरिक्त शिविर आयोजित कर सकेंगे। हालांकि, यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि इन अतिरिक्त शिविरों के आयोजन से अभियान की अन्य गतिविधियां बाधित न हों।
सीएम नीतीश कुमार (फाइल फोटो: ANI)
महादलित टोलों और बस्तियों को विशेष प्राथमिकता
राजस्व महा-अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में सचिव जय सिंह ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि महादलित टोलों और बस्तियों को विशेष प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन क्षेत्रों में जमाबंदी पंजी की प्रति हर हाल में समय पर उपलब्ध कराई जाए। कई स्थानों पर बंदोबस्त की गई भूमि की जमाबंदी प्रति महादलित परिवारों तक समय पर नहीं पहुंच रही है। इसे ध्यान में रखते हुए, अब वितरण दल को पहले महादलित बस्तियों में जाकर जमाबंदी की प्रति और आवश्यक आवेदन प्रपत्र उपलब्ध कराने होंगे, ताकि वे शिविरों में आकर त्रुटियों के समाधान के लिए आवेदन दे सकें।
महा-अभियान 20 सितंबर तक
इसके साथ ही विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि जन प्रतिनिधियों को भी उनकी भूमि से संबंधित जमाबंदी पंजी की प्रति और निर्धारित प्रपत्र देना अनिवार्य होगा। विभाग का मानना है कि रैयतों की तरह जन प्रतिनिधियों को यह सुविधा देने से वे न केवल अभियान की निगरानी में सक्रिय भूमिका निभा सकेंगे, बल्कि लोगों को भी जागरूक करने में सहयोग करेंगे। गौरतलब है कि यह राजस्व महा-अभियान 16 अगस्त से शुरू होकर 20 सितंबर तक चलेगा। इस अवधि में घर-घर जाकर ऑनलाइन जमाबंदी पंजी की प्रति और विभिन्न जरूरी प्रपत्र वितरित किए जा रहे हैं। साथ ही, शिविरों के माध्यम से जमाबंदी में हुई त्रुटियों का सुधार, छूटी हुई जमाबंदियों को ऑनलाइन करने, बंटवारा-नामांतरण और उत्तराधिकार नामांतरण के आवेदन भी लिए जा रहे हैं। अतिरिक्त शिविरों की अनुमति मिलने से अब ज्यादा से ज्यादा ग्रामीणों को इसका लाभ मिलने की संभावना है।
