यहां है 200 साल पुराना आम का पेड़, पहला दशेरी इसी पेड़ से आया; जानें नाम कैसे पड़ा

क्या आप जानते हैं कि आपका फेवरिट आम दसेरी कहां पैदा होता है। पहली बार यह आम कहां पैदा हुआ और इस स्वादिष्ट व सुगंधित आम को उसका यह नाम कैसे मिला?

आम फलों का राजा है और यह फलों के राजा का समय है। यानी अभी आम का सीजन है और बाजार में हर तरफ अलग-अलग तरह के आम नजर आ रहे हैं। पीले-पीले रसीले आम देखकर ही लालच आने लगता है। लेकिन एक आम है, जिसका शायद हर कोई दीवाना होता है। बड़ी बात ये कि यह आम पूरी तरह से पीला भी नहीं होता, बल्कि हरे और पीले रंग का मिश्रण होता है। जी हां, दशेरी आम बाहर से हरा ही रहता है, लेकिन उसकी मिठास हर किसी को पसंद आती है। दशेरी आम की खासियत ये होती है कि इसे काटने का झंझट नहीं होता। एक तरफ से मुंह लगाया और आम का पूरा रस (Pulp) सीधे मुंह में घुलता चला जाता है। क्या आप जानते हैं कि आपके फेवरिट आम का नाम दशेरी कैसे पड़ा, पहली बार यह आम कहां पैदा हुआ और इसको ये नाम कैसे मिला? चलिए जानते हैं -

Dasheri mango.

कहां पैदा होता है दशेरी आम?

मैंगो कैपिटल

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के पास ही आमों की राजधानी मलीहाबाद है। मलीहाबाद अपने आमों के लिए मशहूर है। यहां के लोग कई पीढ़ियों से आम का उत्पादन कर रहे हैं। यहां के आम के बागों में कई तरह के आम होते हैं। मलीहाबाद में हजारों हेक्टेयर में आम के बगीचे हैं और देश में आमों के उत्पादन में मलीहाबाद का अनोखा नाम है। यहां की अनोखी मिट्टी और वातावरण यहां स्वादिष्ट आमों के उत्पादन के लिए बेहतरीन परिस्थितियां बनाती हैं।

End of Feed