Omar Abdullah Statehood Motion: जम्मू-कश्मीर विधानसभा में उस समय हंगामा हो गया जब मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग वाला प्रस्ताव पेश किया। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव में वर्ष 2000 में जम्मू-कश्मीर विधानसभा (JK Assembly Resolutio) द्वारा पारित प्रस्ताव का भी संदर्भ दिया गया, जिसमें पूर्ण स्वायत्तता और 1953 से पहले की स्थिति बहाल करने की मांग की गई थी।
उमर अब्दुल्ला के प्रस्ताव पर बीजेपी का भारी हंगामा
उस समय जम्मू-कश्मीर का अपना प्रधानमंत्री और सदर-ए-रियासत हुआ करता था। बीजेपी ने इस संदर्भ पर आपत्ति जताई और विधानसभा के वेल में आकर विरोध प्रदर्शन किया। बीजेपी विधायकों ने शून्यकाल के दौरान नारेबाजी की, जिसके बाद स्पीकर को सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी।
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सोमवार को सदन में चर्चा
अब इस प्रस्ताव पर सोमवार को सदन में चर्चा होगी। मुद्दे पर अपने शुरुआती बयान में उमर अब्दुल्ला ने कहा, “मैं चाहता हूं कि यह सदन इस प्रस्ताव पर चर्चा करे और इसे पारित करे। जम्मू-कश्मीर के लोगों से इस सदन के पटल पर और सुप्रीम कोर्ट में वादा किया गया था। तीन चरणों की प्रक्रिया का वादा किया गया था—परिसीमन, चुनाव और राज्य का दर्जा बहाल करना।
अपनी स्वतंत्र इच्छा से लोगों ने चुनाव में लिया हिस्सा-उमर अब्दुल्ला
परिसीमन हुआ और लोगों ने अपनी स्वतंत्र इच्छा से चुनाव में भाग लिया। हमने इंतजार किया और हर बैठक में भारत सरकार के साथ बने रहे। “इस सदन के माध्यम से हम एक बार फिर भारत सरकार को राज्य का दर्जा बहाल करने की याद दिलाना चाहते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा है कि ये आम वादा नहीं है, ये प्रधानमंत्री का वादा है।"
उन्होंने यह भी कहा कि कुछ नागरिक विभाग, जिनमें कश्मीर पावर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड और SKIMS (Sher-i-Kashmir Institute of Medical Sciences) शामिल हैं, वे भी निर्वाचित सरकार के नियंत्रण में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान वह सरकार के सामने आने वाली कठिनाइयों के बारे में और जानकारी साझा करेंगे।
