नोएडा/ग्रेनो : दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में लगातार पॉल्यूशन का स्तर बढ़ रहा है। उधर,NGT ने नोएडा और ग्रेटर नोएडा में बड़े पैमाने पर हो रहे अवैध और अनधिकृत निर्माण पर गंभीर चिंता जताई है। जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि स्थानीय प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (Pollution Control Board) को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पर्यावरण मानकों का उल्लंघन करने वाले किसी भी निर्माण को तुरंत रोका जाए। याचिकाकर्ता राजेंद्र त्यागी ने NGT में अर्जी दाखिल कर आरोप लगाया था कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा में कई रेजिडेंशियल और कमर्शियल प्रोजेक्ट बिना पर्यावरण मंजूरी के बनाये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह न केवल अवैध है बल्कि क्षेत्र के भूजल और पर्यावरण पर गंभीर असर डाल रहा है।
(फाइल फोटो-Istock)
UPPCB ने लिया एक्शन
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB) ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि उसने पांच प्रमुख निर्माण प्रोजेक्ट पर एक्शन लिया है। इनमें से चार पर बंदी आदेश (क्लोजर ऑर्डर) जारी किए गए हैं और लाखों रुपये का पर्यावरण मुआवजा भी लगाया गया है।
इन पर हुआ एक्शन
1. गाजियाबाद डेवलपर्स और भगवती डेवलपर्स (द्वारका सिटी कॉलोनी) 21.40 लाख रुपये जुर्माना
2. सहारा एन्क्लेव, जीटी रोड, ग्रेटर नोएडा: 21.40 लाख रुपये जुर्माना
3. पीपी एस्टेट, धूम मानिकपुर, 15 लाख रुपये जुर्माना
4. एस्कॉन प्राइड विला, बिरोंडी सेक्टर पी-1 और 2- 10.50 लाख रुपये जुर्माना
5. त्रिलोकपुरम ग्रीन्स नाम की एक परियोजना को कंसेंट टू एस्टेबलिश (CTE) मंजूरी मिल चुकी है।
गौतम बुद्ध नगर के जिलाधिकारी ने हलफनामा दाखिल कर बताया कि 26 जुलाई 2025 को राजस्व और पुलिस की संयुक्त टीम ने कई जगह अवैध निर्माणों को ध्वस्त किया।
- गढबरा गांव में 12 अवैध फार्महाउस गिराए गए
- मोमनाथल गांव में 16 बीघा जमीन मुक्त कराई गई
- सिकंदरपुर गांव में 72 बीघा जमीन, जिसकी कीमत करीब 100 करोड़ बताई गई, खाली कराई गई
- लखनवाली, कसाना, चुहड़पुर बंगर और अमरपुर गांवों में भी अवैध निर्माण हटाए गए
बिना पर्यावरण स्वीकृति के हो रहा था निर्माण
जिलाधिकारी ने 11 अगस्त 2025 को एक संयुक्त समिति बनाई जिसमें एसडीएम, ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी, यूपीपीसीबी और भूजल विभाग के अधिकारी शामिल थे। समिति ने 18 अगस्त को समटल कलर पिक्चर ट्यूब्स/ भगवती डेवलपर्स और सहारा एन्क्लेव, छपरोला साइटों का निरीक्षण किया। जांच में पाया गया कि इन दोनों जगहों पर निर्माण कार्य आंशिक रूप से जारी था। रिपोर्ट में कहा गया कि यदि किसी परियोजना का निर्मित क्षेत्र 20,000 वर्गमीटर से अधिक है तो पर्यावरण स्वीकृति (EC) जरूरी है, और 5,000 वर्गमीटर से ऊपर के निर्माण के लिए यूपीपीसीबी की सहमति (CTE/CTO) आवश्यक होती है।
NGT ने साफ किया है कि प्रशासन को इस तरह के अवैध निर्माणों की शुरुआत ही नहीं होने देनी चाहिए। NGT ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता अन्य अवैध परियोजनाओं की सूची सौंपते हैं, तो यूपीपीसीबी और ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी दोनों को चार हफ्ते के भीतर जांच कर दंडात्मक कार्रवाई करनी होगी।
सभी विभागों को 5 जनवरी 2026 से पहले स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। याचिकाकर्ता के वकील आकाश वशिष्ठा ने दलील दी कि जिन परियोजनाओं पर बंदी आदेश जारी हुए थे, वहां अभी भी निर्माण जारी है। उन्होंने कहा कि कई नई परियोजनाएं भी बिना पर्यावरण मंजूरी के शुरू हो गई हैं।
