Noida International Airport News: नागर विमानन मंत्री के राममोहन नायडू ने शनिवार को कहा कि नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से वाणिज्यिक उड़ानें (कमर्शियल फ्लाइट) अगले 45 से 60 दिनों में शुरू हो जाएंगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा उत्तर प्रदेश के जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (एनआईए) का उद्घाटन शनिवार को किया गया। नायडू ने कहा कि हवाई अड्डे से उड़ानें 45 से 60 दिनों में शुरू हो जाएंगी। उन्होंने बताया कि हवाई अड्डे की सुरक्षा योजनाओं पर काम चल रहा है और इंडिगो हवाई अड्डे से उड़ानें शुरू करने के लिए उत्सुक है। लेकिन इस एयरपोर्ट के शुभारंभ से सबसे ज्यादा खुश नोएडावासी और दिल्ली एनसीआर के लोग हैं।
नोएडा एयरपोर्ट से वाणिज्यिक उड़ानें 45-60 दिनों में होंगी शुरू
सारस-प्रेरित नया प्रतीक चिह्न अपनाया
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा उद्घाटन किए गए जेवर एयरपोर्ट ने अपनी ब्रांड पहचान के लिए सारस-प्रेरित नया प्रतीक चिह्न अपनाया है, जो उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक, सतत विकास की सोच को दर्शाता है। हवाई अड्डा प्रबंधन के अनुसार उत्तर प्रदेश के राजकीय पक्षी 'सारस’ को प्रतीक चिह्न में शामिल कर इसे खास और वैश्विक स्तर पर पहचान देने की कोशिश की गई है। यह पहल राज्य की सांस्कृतिक समृद्धि, परंपरा और प्रकृति के प्रति जुड़ाव को रेखांकित करती है।
सांस्कृतिक पहचान और पर्यावरणीय संतुलन
बयान में कहा गया कि यह कदम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस दृष्टिकोण को भी दर्शाता है, जिसमें विकास के साथ सांस्कृतिक पहचान और पर्यावरणीय संतुलन को समान महत्व दिया जा रहा है। प्रतीक चिह्न को पतली और एकीकृत रेखाओं से डिजाइन किया गया है, जो गति, कनेक्टिविटी और आधुनिक बुनियादी ढांचे का प्रतीक हैं। इसमें इस्तेमाल किया गया नीला-हरा रंग तकनीकी प्रगति और पर्यावरण संरक्षण के संतुलन को दर्शाता है।
नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ते उत्तर प्रदेश का प्रतीक
प्रतीक चिह्न में उड़ता हुआ सारस प्रगति, आत्मविश्वास और नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ते उत्तर प्रदेश का प्रतीक माना गया है। यह राज्य को वैश्विक निवेश और कनेक्टिविटी हब के रूप में विकसित करने के विजन को भी प्रतिबिंबित करता है। अधिकारियों के अनुसार, यह नया प्रतीक न केवल हवाई अड्डे की ब्रांडिंग को मजबूत करेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी अलग और प्रभावी पहचान भी स्थापित करेगा। अब यह एयरपोर्ट सिर्फ एक परिवहन केंद्र नहीं, बल्कि संस्कृति, आधुनिकता और सतत विकास का प्रतीक बनकर उभर रहा है।
(इनपुट - भाषा)
