NEET पेपर लीक केस में CBI इन्वेस्टिगेशन पर सवाल, FIR में 5 दिन की देरी बना मुद्दा; जांच को कोर्ट में चुनौती

NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में आरोपियों ने राउज एवेन्यू कोर्ट में CBI जांच की वैधता पर सवाल उठाए। बचाव पक्ष ने 7 मई को जानकारी मिलने के बावजूद 12 मई को FIR दर्ज होने पर सवाल उठाते हुए पांच दिन की देरी का मुद्दा उठाया।

दिल्ली : नीट यूजी पेपर लीक मामले में आरोपियों ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच की वैधता पर सवाल उठाए हैं। आरोपियों की ओर से राउज एवेन्यू कोर्ट में दलील दी गई कि जांच सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम से जुड़े Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act, 2024 के प्रावधानों के अनुरूप नहीं की गई। आरोप तय करने को लेकर चल रही सुनवाई के दौरान आरोपी मनीषा गुरुनाथ मंधारे और पी.वी. कुलकर्णी की ओर से पेश वकीलों ने दावा किया कि CBI की जांच कथित तौर पर 2024 के कानून की धारा 12 के विपरीत है। बचाव पक्ष ने जांच की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे बाद में तैयार की गई कार्रवाई बताया।

NEET UG 2026 Paper Leak

फाइल फोटो

FIR दर्ज करने में पांच दिन की देरी पर सवाल

बचाव पक्ष के वकीलों ने दलील दी कि सीबीआई को कथित पेपर लीक की जानकारी 7 मई 2026 को मिल गई थी, लेकिन एजेंसी ने 12 मई 2026 को FIR दर्ज की। वकीलों का कहना है कि चार्जशीट में FIR दर्ज करने में हुई पांच दिन की देरी का स्पष्ट कारण नहीं बताया गया है। बचाव पक्ष के मुताबिक, FIR में देरी और जांच से जुड़े अन्य पहलू CBI की कार्रवाई की वैधता और उसके तरीके पर सवाल खड़े करते हैं।

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