बिहार में आज यानी मंगलवार 31 मार्च को नालंदा स्थित बिहार शरीफ के मघड़ा स्थित शीतला मंदिर में भगदड़ मच गई। भगदड़ के दौरान कई श्रद्धालु नीचे गिर गए और भारी भीड़ के बीच दब गए। इस हादसे में अब तक 8 लोगों की मौत की खबर है, जबकि कई अन्य लोगों के घायल होने की सूचना है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मृतकों के परिजनों के लिए आपदा प्रबंधन विभाग से 4 लाख रुपये और मुख्यमंत्री राहत कोष से 2 लाख रुपये (कुल 6 लाख रुपये) की सहायता राशि देने की घोषणा की।
नालंदा के शीतला मंदिर में भगदड़
बताया जा रहा है कि मंदिर में बहुत अधिक भीड़ थी, जिसके कारण यह भगदड़ मची। बता दें कि आज मघड़ा स्थित शीतला मंदिर में पूजा करने के लिए सैकड़ों लोग पहुंचे थे। भीड़ ज्यादा होने के चलते यह हादसा हुआ।
भगदड़ की जानकारी मिलते ही दीपनगर थाना पुलिस घटनास्थल पर पहुंची। पुलिस ने पहुंचते ही यहां राहत और बचाव कार्य चलाया। पुलिस ने वहां मौजूद लोगों की मदद से सभी घायलों को नजदीकी मॉडल अस्पताल में पहुंचाया गया। मृतकों को मॉर्च्युरी में भेजा जा रहा है। राहत और बचाव कार्य अब भी जारी है।
दुर्घटना के समय मंदिर में मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि मंदिर में भारी भीड़ उमड़ी थी। स्थानीय अधिकारियों ने भी पुष्टि की है कि भगदड़ में लगभग 10-12 श्रद्धालु घायल हुए हैं।
बता दें कि हर मंगलवार को नालंदा के इस शीतला मंदिर में पूजा करने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। मंगलवार को हजारों भक्त यहां होने वाले अनुष्ठानों में भाग लेने के लिए आते हैं।
सिद्धपीठ है ये मंदिर
बिहारशरीफ के अंबेडकर चौक से करीब 2 किमी दूरी पर मघड़ा गांव में सिद्धपीठ शीतला माता मंदिर है। इस मंदिर में श्रद्धालुओं की अपार आस्था है। मंदिर प्राचीनकाल से ही आस्था का केंद्र रहा है। इसी मंदिर में गुप्तकाल के दौरान चंद्रगुप्त द्वितीय के समय चीनी यात्री फाहियान ने भी पूजा की थी। फाहियान ने अपने लेखों में भी इस शीतला मंदिर की चर्चा की है।
फाहियान ने मंदिर के बारे में क्या बताया?
फाहियान अपने लेखों में बताते हैं कि पंचाने नदी के मुहाने पर उसे असीम शांति और शीतलता का एहसास हुआ। बता दें कि गुप्तकाल को मंदिरों के लिए स्वर्ण युग कहा जाता है। इस शीतला माता मंदिर के बारे में स्कंद पुराण में भी जिक्र मिलता है।
चेचक रोग की अधिष्ठात्री देवी हैं शीतला माता
शितला माता को चेचक रोग की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। दूसरी मान्यता ये भी है कि एक बार पूरे इलाके में चेचक रोग फैला और हाहाकार मच गया। उस समय ग्रामीणों के सपने में देवी ने दर्शन दिए। देवी ने एक खास जगह पर खुदाई करने को कहा। उस खुदाई में वहां एक मूर्ति मिली, जिसे ग्रामीणों ने शीतला माता मंदिर का स्वरूप दिया।
