नवरात्रि महोत्सव के बीच नागपुर में बुधवार रात गरबा पंडालों पर विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल की पहल सुर्खियों में है। ज़ेरिल लॉन स्थित एक गरबा आयोजन में कार्यकर्ता पहुंचे और वहां प्रतिभागियों के आधार कार्ड की जांच करने लगे। कार्यकर्ताओं का कहना था कि यह कदम हिंदू युवतियों की सुरक्षा और “लव जिहाद” जैसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए उठाया गया है।
गरबा पंडाल (फाइल फोटो: canva)
तस्वीरों और वीडियो में देखा जा सकता है कि प्रवेश द्वार पर आने वाले युवाओं से पहचान पत्र मांगा जा रहा है। इसके बाद माता की मूर्ति के समक्ष संक्षिप्त पूजन कराया गया, माथे पर तिलक लगाया गया और हाथ में कलावा बांधा गया। इन औपचारिकताओं के बाद ही युवाओं को गरबा खेलने की अनुमति दी गई। कार्यकर्ताओं ने स्थल पर गंगा जल का छिड़काव भी किया।
गरबा आयोजनों में पहचान पत्र जांच का मुद्दा नया नहीं है। गुजरात, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में भी नवरात्रि के दौरान इस तरह की पहल पहले की जा चुकी है। समर्थक इसे सुरक्षा और धार्मिक परंपराओं की रक्षा से जोड़ते हैं, वहीं आलोचक मानते हैं कि त्योहारों की सांस्कृतिक और समावेशी भावना पर इससे असर पड़ता है।
नागपुर की इस पहल ने गरबा पंडालों में पहचान पत्र जांच की बहस को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। समर्थक इसे सुरक्षा और परंपरा की दृष्टि से ज़रूरी मानते हैं, जबकि आलोचक इसे त्योहार की खुली और सामूहिक भावना के विपरीत बताते हैं। फिलहाल, इस कदम को लेकर समाज के अलग–अलग वर्गों में चर्चाएं तेज़ हैं और देखना होगा कि आगे प्रशासनिक और सामाजिक स्तर पर इसकी दिशा क्या रहती है।
