नागपुर में 75 साल पहले शुरू हुई थी रावण बनाने की परंपरा, दिलचस्प है इसकी कहानी

नागपुर में पहला रावण दहन 75 साल पहले किया गया था। आज भी यहां रावण के पुतले को बनाने का काम एक ही परिवार की पीढ़ी कर रही है। यहां का पहला रावण दहन रविनगर मैदान में किया गया था और पहला पुतला 35 फीट ऊंचाई का था।

Nagpur Dussehra : महाराष्ट्र के नागपुर के दशहरे में कुछ अलग बात है। यहां के दशहरे में शहर भर में जितने भी रावण के पुतले बनते हैं, उन्हें एक ही परिवार के लोग बनाते हैं। खास बात ये है कि जिस व्यक्ति ने यहां पर पहली बार रावण दहन के लिए पुतला बनाया था, आज उन्हीं के परिवार की तीसरी पीढ़ी शहरभर में आयोजित होने वाले दशहरा उत्सवों के लिए रावण का पुतला बनाती है। नागपुर में रावण दहन की परंपरा का इतिहास 75 साल पुराना है। यहां पर पहले दशहरा तो मनाया जाता था, लेकिन रावण दहन नहीं किया जाता था। 75 साल पहले नागपुर का पहला रावण का पुतला बना और यहां के लोगों ने पहली बार रावण को दहन होते देखा।

nagpur Ravan Dahan

नागपुर के रावण दहन का इतिहास (फोटो साभार - ट्विटर)

75 साल पुराना इतिहास

नागपुर में रावण दहन की शुरुआत करने का श्रेय जिन लोगों को जाता है उनमें से एक प्रोफेसर ध्यानसिंह ठाकुर हैं। दरअसल साल 1948 में एक प्रोफेसर ध्यानसिंह नागपुर आए थे, उस समय उन्होंने देखा कि नागपुर में दशहरा को बिना रावण दहन के ही मनाया जा रहा है। उस समय केवल उत्तर भारत और दिल्ली में भी रावण का दहन किया जाता था। जिसके बाद प्रोफेसर ने नागपुर में रावण दहन की शुरुआत की। लेकिन उस समय की बड़ी समस्या ये थी कि दहन करने के लिए रावण का पुतला कहां से आएगा। ऐसे में 85 साल के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी हेमराजसिंह बिनवार से संपर्क किया गया। हेमराजसिंह कागज और बांबू से कलाकृति बनाने में माहिर थे। उन्होंने रावण का पुतला बनाने के लिए हामी भर दी और पंजाब सेवा समिति ने रावण दहन की तैयारी की जिम्मेदारी उठाई।

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