मुंबई: सेंट्रल रेलवे ने 14 सितंबर को सोलापुर डिवीजन में देशी तकनीक से बने आधुनिक KAVACH सुरक्षा सिस्टम का पहला सफल ट्रायल पूरा कर लिया है। यह ट्रायल धवाला और भालवानी स्टेशनों के बीच 26 किलोमीटर के ट्रैक पर किया गया। इस मौके पर सेंट्रल रेलवे के जनरल मैनेजर धर्मवीर मीणा समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
कवच से रेल सफर होगा और सुरक्षित
“KAVACH” को भारतीय रेल का सुरक्षा कवच माना जा रहा है। यह सिस्टम ट्रेन को लाल सिग्नल पार करने से रोकता है, तेज़ रफ़्तार पर ब्रेक लगाता है, आपातकालीन स्थिति में स्टेशन मास्टर या ब्लॉक सेक्शन से एसओएस सिग्नल भेजता है और टर्नआउट पर ट्रेन को धीमा करता है। सीधी भाषा में कहें तो, यह तकनीक ट्रेन टक्कर, ओवरस्पीड और दुर्घटनाओं से बचाव का मजबूत हथियार है।
- यात्रियों को मिलने वाले फायदे भी कम नहीं हैं:
- अब रेल सफर और भी सुरक्षित होगा।
- ट्रेन के समय पर चलने की संभावना बढ़ेगी क्योंकि सिस्टम मानव भूल को रोक देगा।
- यात्रियों को विश्वसनीयता और भरोसा मिलेगा कि सफ़र में हर पल उनकी सुरक्षा का ध्यान रखा जा रहा है।
- भविष्य में ऑटोमेशन और आधुनिक तकनीक से जुड़कर भारतीय रेल का मानक और भी ऊँचा होगा।
यही नहीं, कुरुडवाड़ी में पहला “KAVACH” ट्रेनिंग सेंटर और सिमुलेशन लैब भी खोला गया है, जहाँ लोको पायलट्स को आधुनिक सुरक्षा प्रोटोकॉल की ट्रेनिंग दी जाएगी। इसका मतलब है कि आने वाले समय में सभी पायलट और रेलकर्मी इस तकनीक को बखूबी इस्तेमाल करना सीखेंगे।
रेलवे बोर्ड ने सेंट्रल रेलवे की 730 लोकोमोटिव्स में “KAVACH” लगाने की मंज़ूरी दे दी है। अगस्त 2025 तक 50 इंजन पर यह तकनीक लग चुकी है और काम तेजी से जारी है। भारतीय रेल इसे मिशन मोड में लागू कर रही है। इसका सीधा लाभ आम यात्रियों को मिलेगा – अब रेल सफर न सिर्फ आरामदायक बल्कि और भी सुरक्षित होगा।
