महाराष्ट्र में एक ऐसा गांव है, जहां के लोग दुल्हन के लिए तरस रहे हैं। यहां रहने वाले लड़कों को शादी के रिश्ते नहीं मिल रहे हैं। यह गांव छत्रपति संभाजीनगर में स्थित तांड्या गांव है। इस गांव में पानी की कमी है। महिलाओं को रोजाना मीलों चलकर पानी लाने के लिए जाना पड़ता है। इस कारण गांव के लड़कों के लिए अच्छे रिश्ते आना बंद हो गए हैं। जिससे गांवे के पुरुषों की शादी नहीं हो रही और उन्हें दुल्हन नहीं मिल रही।
सांकेतिक फोटो
सालभर पानी की कमी से जूझता है गांव
छत्रपति संभाजीनगर के तांड्या गांव में लगभग 3000 लोग रहते हैं। यह गांव पानी की कमी से जूझ रहा है। यहां सालभर पानी का संकट बना रहता है। गर्मियों के मौसम में यह स्थिति और खराब हो जाती है। ऐसे में महिलाओं और बच्चों को तेज गर्मी और चिलचिलाती धूप में कोसों दूर पानी के स्त्रोतों तक जाना पड़ता है। एशिया के सबसे बड़ बांधों में से एक जयकवाड़ी बांध इस गांव से करीब 25-30 किमी दूर है। जहां से पानी लाने के लिए गांव की महिलाएं जाती है। बच्चों को भी स्कूल से वापस आने के बाद पानी लाने में महिलाओं की मदद करनी पड़ती है।
गांव में नहीं देना चाहते लोग अपनी बेटी
पानी की कमी के चलते गांव में लगे नल सूख रहे हैं। वहीं टैंकरों से आने वाला पानी भी 10-12 दिनों एक बार आपूर्ति करता है। ऐसे में गांव की महिलाओं को पानी लाने के लिए मीलों चलने के लिए मजबूर होना पड़ता है। ऐसे में लड़कियों के परिवार को चिंता है कि उनकी बेटियों को जीवनभर पैदल चलना पड़ेगा। इस कठिनाई के कारण बेटियों के परिवार इस गांव में उनकी शादी करने के मामले में पीछे हट जाते हैं।
