Mumbai: जलाशयों के कायाकल्प को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हिंदुजा समूह ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। इस पहले से हिंदुजा फाउंडेशन (एचएफ) ने हन्नीकल्लू दलदल (मार्श) को मीठे पानी के दलदल के रूप में पुनर्जीवित करने का फैसला लिया, जो वेटलैंड हैबिटैट में स्थित है। बता दें कि 12 एकड़ में फैली इस परियोजना को क्रियान्वित भारत की सबसे पुरानी सैन्य रेजिमेंट मद्रास रेजिमेंट सेंटर के जरिए किया जा रहा है। मद्रास रेजिमेंट का मुख्यालय वेलिंगटन में है। वेलिंगटन इको पार्क को पुनर्जीवित करने के बाद इसका उद्घाटन हिंदुजा फाउंडेशन के अध्यक्ष श्री पॉल अब्राहम और एआरसी के कमांडेंट ब्रिगेडियर एसके यादव द्वारा किया गया है। उद्घाटन के लिए एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। बता दें कि हिंदुजा समूह 110 साल पुरानी है। इसे 1914 में स्थापित किया गया था।
वेलिंगटन पार्क के हन्नी कल्लू दलदल को किया पुनर्जीवित
हन्नीकल्लू मार्श को पुनर्जीवित किया गया
हन्नीकल्लू दलदल (मार्श) का संरक्षण करना आवश्यक था। पिछले कई सालों में इस स्थान का प्रयोग कचरा डालने, अतिक्रमण तथा सीवेज निपटान के लिए किया जा रहा था। लेकिन अब मार्श के कायाकल्प के बाद ये 25000 से अधिक लोगों के लिए लाभकारी है। कायाकल्प करने के बाद पूरी प्रणाली को पानी मिल रहा है।हन्नीकल्लू मार्श का कायाकल्प करने की परियोजना के लिए केयर अर्थ ट्रस्ट ने जैव विविधता मूल्यांकन किया और उसके आधार पर वेटलैंड को गंभीर रूप से प्रभावित करने वाले इनवेसिव पौधों की पहचान की। पौधों की इन प्रजातियों को 33,167 वर्ग मीटर के दायरे से हटा दिया गया है। इस क्षेत्र को पुनर्जीवित करने के लिए स्वस्थ वनस्पतियों को लगाया गया।
इतना ही नहीं हन्नीकल्लू मार्श को ताजा पानी देने के लिए 10 पहाड़ी झरने को भी पुनर्जीवित किया गया है। यात्रियों के चलने के लिए 1.5 किमी पैदल यात्री पथ बनाया गया। पानी के लिए करीब 2,000 क्यूबिक मीटर मिट्टी को निकाला गया और एक चेक डैम का निर्माण किया गया। जानकारी के लिए बता दें कि इस पूरी परियोजना को हिंदुजा समूह की प्रमुख कंपनी अशोक लीलैंड ने वित्तपोषित किया है।
सीएसआर कार्यक्रम और जल जीवन के तहत पूरी हुई परियोजना
हन्नीकल्लू मार्श और पहाड़ी झरने को पुनर्जीवित करने के साथ चेक डैम का निर्माण हिंदुजा फाउंडेशन ने अपने प्रमुख सीएसआर कार्यक्रम और जल जीवन के तहत किया है। इन कार्यक्रमों के माध्यम से 5 सालों में भारत में 110 गांवों में 4 मिलियन से अधिक लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाए गए हैं। कई जल संरक्षण पहलों में फाउंडेशन ने 3.8 मिलियन से अधिक पानी के टैंकरों के बराबर भूजल को रिचार्ज किया है। इसके माध्यम से करीब 31 मिलियन जेरी कैन के बराबर सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया है। देश की करीब 56 झीलों और कई जल निकायों को बहाल करने का काम किया गया है। हिंदुजा समूह की कालाकल्प परियोजना में अहमदाबाद में मकरबा टैंक, राजस्थान के जोधपुर में नवलखा बावड़ी, अलवर में रानी मूसी सागर और नई दिल्ली में हौज शम्शी जैसी विरासती बावड़ियां शामिल हैं।
हिंदुजा फाउंडेशन के अध्यक्ष पॉल अब्राहम ने कहा कि "जल संकट जल्द ही पूरे भारत में वास्तविकता बनने जा रहा है। यदि सरकारी रिपोर्ट पर विश्वास करें तो भारत की 1.3 अरब आबादी में से कम से कम 40% लोगों के पास 2030 तक पीने के पानी का कोई विश्वसनीय स्रोत नहीं होगा। इस सबके मद्देनज़र हर बूंद को बचाने के लिए जल संरक्षण करना हिंदुजा फाउंडेशन का प्रमुख लक्ष्य है।"
