मिर्गी न तो लाइलाज, न ही मानसिक विकार, यह तलाक का आधार नहीं...बॉम्बे हाई कोर्ट का फैसला

  • Edited by: अमित कुमार मंडल
  • Updated Sep 27, 2023, 03:57 PM IST

पीठ ने अपने आदेश में कहा कि मिर्गी न तो लाइलाज बीमारी है और न ही इसे मानसिक विकार या मनोरोग माना जा सकता है, जिससे कि यह हिंदू विवाह अधिनियम के तहत तलाक का आधार बने।

Bombay High Court: बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ ने कहा है कि पति या पत्नी में से किसी एक को मिर्गी की बीमारी होना क्रूरता नहीं है और यह हिंदू विवाह अधिनियम के तहत तलाक का आधार नहीं है, क्योंकि मिर्गी न तो लाइलाज बीमारी है और न ही इसे मानसिक विकार माना जा सकता है। न्यायमूर्ति विनय जोशी और न्यायमूर्ति एस ए मेनेजेस की खंडपीठ ने मंगलवार को अपने आदेश में 33 वर्षीय एक व्यक्ति द्वारा दायर याचिका खारिज कर दी, जिसमें उसने अपनी पत्नी से क्रूरता के आधार पर तलाक का अनुरोध किया था। व्यक्ति ने दावा किया था कि उसकी पत्नी मिर्गी से पीड़ित है, जिसके कारण वह मानसिक रूप से अस्वस्थ है।

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बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला

मिर्गी न तो लाइलाज बीमारी, न ही इसे मानसिक विकार ...

पीठ ने अपने आदेश में कहा कि मिर्गी न तो लाइलाज बीमारी है और न ही इसे मानसिक विकार या मनोरोग माना जा सकता है, जिससे कि यह हिंदू विवाह अधिनियम के तहत तलाक का आधार बने। व्यक्ति ने अपनी याचिका में कहा कि उसकी पत्नी मिर्गी से पीड़ित है, जिसके कारण वह मानसिक रूप से स्वस्थ नहीं है, जो क्रूरता है और इसलिए वह उसके साथ नहीं रह सकता। व्यक्ति ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13 (1) (3) के तहत तलाक का अनुरोध किया था।

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