किंग चार्ल्स की ताजपोशी में शामिल होंगे मुंबई के डब्बावाले, 133 साल का शानदार इतिहास

  • Authored by: ललित राय
  • Updated May 4, 2023, 10:58 AM IST

Mumbai Dabbawala History: मुंबई के डब्बावालों के बारे में कहा जाता है कि आप अपनी घड़ी की मिलान उनकी डब्बा डिलिवरी से कर सकते हैं। तय समय, गुणवत्तायुक्त खाने की चर्चा ना सिर्फ हिंदुस्तान में बल्कि विदेशों में होती है। ब्रिटेन का शाही परिवार तो इन डब्बावालों का मुरीद है।

KEY HIGHLIGHTS
  • 1890 में मुंबई से आगाज
  • 133 साल का शानदार इतिहास
  • समय के पाबंद हैं डब्बावाले

Mumbai Dabbawala History: मुंबई की पहचान आर्थिक राजधानी, मायानगरी, लोकल ट्रेन से तो है ही इसके साथ डब्बावालों की भी खास भूमिका है। कहते हैं कि मुंबई की लाइफलाइन(Dabbawala News) पर भले ही असर पड़े। लेकिन डब्बावाले पर अपने क्लांट्स को लेकर इतने समर्पित होते हैं कि वो किसी भी मुश्किल की परवाह नहीं करते। मुंबई हमले के बाद जब पूरा शहर ठहर गया तो उस समय भी डब्बावाले(Dabbawala service Mumbai) अपनी सेवा देते रहे। मुंबई के डब्बावाले एक बार फिर चर्चा में हैं। किंग्स चार्ल्स की ताजपोशी (King Charles Coronation) में उन्हें विशेष मेहमान की तरह बुलाया गया है। यहां हम बताएंगे कि मुंबई शहर से इन डब्बावालों का नाता कबसे है, वो किस तरह से अपने फर्ज को अंजाम देते हैं। मुंबई में घर और दफ्तर तक टिफिन बॉक्स यानी डब्बा पहुंचाने की शुरुआत 1890 से हुई। खासतौर से मुंबई में रहने वाले पारसी और अंग्रेज परिवारों में इस तरह की डिमांड थी। महादेव भावाजी बछ्छे(Mahadev Bhavaji ) पहले वो शख्स से जिनको पहला डब्बावाला होने का गौरव हासिल हुआ।

Mumbai Dabbawala

1890 में मुंबई में डब्बावालों ने की शुरुआत

डब्बावालों पर एक नजर

  • 1890 में मुंबई में से शुरुआत
  • पारसी और ब्रिटिश लोगों की थी डिमांड
  • समय और गुणवत्तायुक्त खाना पहचान
  • ब्रिटेन के राजशाही से खास संबंध

End of Feed