भोपाल : मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के विजन और उच्च शिक्षा विभाग के नवाचारों का सुखद परिणाम सामने आया है। राज्य की 'ई-प्रवेश' (e-Pravesh) प्रणाली ने उच्च शिक्षा में प्रवेश का एक नया ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित किया है। आंकड़ों के अनुसार, इस शैक्षणिक सत्र में 24 जुलाई तक प्रदेश के शासकीय और अशासकीय महाविद्यालयों में कुल 4 लाख 89 हजार 169 विद्यार्थियों ने अपना प्रवेश सुनिश्चित किया है, जो पिछले चार वर्षों में इसी अवधि का सर्वाधिक आँकड़ा है।
सीएम मोहन यादव, मध्य प्रदेश
डिजिटल व्यवस्था बनी सफलता की कुंजी
इस उल्लेखनीय वृद्धि का मुख्य श्रेय विभाग द्वारा विकसित ई-प्रवेश पोर्टल और मोबाइल ऐप को जाता है। इस पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी प्रणाली ने विद्यार्थियों और अभिभावकों को अनावश्यक भागदौड़ से मुक्ति दिलाई है। अब पंजीयन, दस्तावेज सत्यापन, चॉइस फिलिंग से लेकर शुल्क भुगतान तक की प्रक्रिया घर बैठे संभव हो गई है।
'प्रवेश मेला' और 24x7 सुविधा से मिली रफ्तार
विभाग ने प्रवेश प्रक्रिया को विद्यार्थी-केंद्रित बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। प्रदेशभर के महाविद्यालयों में हेल्प सेंटर स्थापित किए गए हैं और समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए 24x7 कॉल सेंटर संचालित किया जा रहा है। विशेष रूप से ‘प्रवेश मेला’ अभियान और कॉलेज लेवल काउंसिलिंग (CLC) के प्रभावी क्रियान्वयन ने रिक्त सीटों को भरने में बड़ी भूमिका निभाई है।
वर्तमान में सीएलसी चरण का अंतिम दौर चल रहा है, जिसकी अंतिम तिथि 31 जुलाई निर्धारित की गई है। उच्च शिक्षा विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रदेश का कोई भी पात्र विद्यार्थी तकनीकी या जानकारी के अभाव में प्रवेश से वंचित न रहे। अब तक कुल 7 लाख 18 हजार 386 विद्यार्थी पोर्टल पर पंजीयन करा चुके हैं, जिनमें अंडर ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन और एनसीटीई पाठ्यक्रमों के छात्र शामिल हैं। विभाग ने छात्रों से अपील की है कि वे निर्धारित समय सीमा के भीतर अपनी प्रक्रिया पूर्ण कर लें।
