एमपी में इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर के पहले फेज का भूमिपूजन, किसानों को 60 फीसदी विकसित भूखंड देने का ऐलान

मध्य प्रदेश में औद्योगिक विकास को नई रफ्तार देने के लिए इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर की शुरुआत की गई है। 2360 करोड़ रुपये की इस परियोजना से रोजगार, निवेश और उद्योगों के विस्तार के नए रास्ते खुलने की उम्मीद है।

Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश में औद्योगिक विकास को नई गति देने के लक्ष्य से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर के प्रथम चरण का भूमिपूजन किया। करीब 2360 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह कॉरिडोर इंदौर के नैनोद गांव में विकसित किया जाएगा। सरकार का दावा है कि इस परियोजना से प्रदेश में उद्योगों का विस्तार होगा और रोजगार व स्व-रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। भूमिपूजन कार्यक्रम के दौरान किसानों ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया और भूमि अधिग्रहण के लिए सहमति पत्र भी सौंपे। सरकार ने इस परियोजना में किसानों को उनकी भूमि का 60 प्रतिशत विकसित भूखंड वापस देने का फैसला किया है। साथ ही अधिग्रहित जमीन का चार गुना मुआवजा भी दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने इसे किसानों को विकास प्रक्रिया का भागीदार बनाने वाला मॉडल बताया।

Indore-Pithampur Economic Corridor Launch

इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर से बदलेगी मध्य प्रदेश की तस्वीर

किसानों, युवाओं और महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों, युवाओं और महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि इंदौर-पीथमपुर कॉरिडोर केवल सड़क परियोजना नहीं, बल्कि औद्योगिक और आर्थिक विकास का बड़ा माध्यम बनेगा। यह कॉरिडोर दिल्ली-मुंबई औद्योगिक कॉरिडोर से भी जुड़ाव स्थापित करेगा, जिससे निवेश और व्यापार गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। सरकार के अनुसार यह परियोजना सुपर कॉरिडोर से पीथमपुर निवेश क्षेत्र तक लगभग 20 किलोमीटर लंबे मार्ग के रूप में विकसित की जाएगी। इसके तहत 75 मीटर चौड़ी मुख्य सड़क और आसपास बफर जोन तैयार किया जाएगा। यह कॉरिडोर राष्ट्रीय राजमार्ग-47 और राष्ट्रीय राजमार्ग-52 को जोड़ते हुए औद्योगिक परिवहन को आसान बनाएगा।

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