Monsoon: दक्षिण-पश्चिम मानसून देश के उत्तरी इलाकों से धीरे-धीरे विदाई ले रहा है। हालांकि, मानसून की यह रवानगी इस बार शांत नहीं रहने वाली है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, मानसून की वापसी के दौरान भी कई राज्यों में आंधी और मूसलाधार बारिश का दौर देखने को मिल सकता है।
मानसून की वापसी के साथ बारिश का दौर
कमजोर पड़ा 'डिप्रेशन', लेकिन यूपी-एमपी की ओर बढ़ा
मध्य भारत में व्यापक बारिश लाने वाला डिप्रेशन अब धीरे-धीरे कमजोर पड़ रहा है। शनिवार को यह सिस्टम उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश और उससे सटे उत्तरी छत्तीसगढ़ पर केंद्रित था। यह लगभग 13 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर बढ़ते हुए दक्षिण-पूर्व उत्तर प्रदेश की तरफ खिसक रहा है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि भले ही यह डिप्रेशन अब कमजोर होकर कम दबाव के क्षेत्र में तब्दील हो जाए, लेकिन इसके प्रभाव से हवा में नमी बनी रहेगी और कई राज्यों में भारी बारिश होती रहेगी।
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उत्तराखंड में 'अत्यंत भारी बारिश' का अलर्ट
मौसम विभाग ने 27 सितंबर को उत्तराखंड के लिए विशेष चेतावनी जारी की है। राज्य के कई स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश और कुछ अलग-थलग इलाकों में अत्यंत भारी बारिश होने की आशंका जताई गई है। पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और नदियों के जलस्तर में वृद्धि का खतरा बना हुआ है।
उत्तर भारत के इन राज्यों में भी बरसेंगे बादल
डिप्रेशन और वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के मिले असर से उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में भी मौसम बदला हुआ रहेगा। हिमाचल प्रदेश और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अलग-अलग स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। पूर्वी उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़ और मध्य प्रदेश में गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम और कुछ जगहों पर भारी बारिश हो सकती है।
मानसून की विदाई का मतलब तुरंत बारिश रुकना नहीं
IMD के आंकड़ों के मुताबिक, मानसून की वापसी रेखा गुरदासपुर, चंडीगढ़, मुजफ्फरनगर, अलीगढ़ और उससे सटे इलाकों से होकर गुजर रही है। जानकारी के लिए बता दें कि 'मानसून विदाई' का मतलब यह नहीं होता कि अचानक से हर जगह बारिश पूरी तरह थम जाएगी। यह एक धीमी प्रक्रिया है, जिसमें नमी और सर्कुलेशन धीरे-धीरे कम होता है। इस बीच यदि अन्य मौसमी प्रणालियां जैसे डिप्रेशन या पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होते हैं, तो वे बारिश का नया दौर ला सकती हैं।
