Monsoon News: यूपी में बारिश और नदियों का रौद्र रूप, बहराइच से कानपुर तक बाढ़ का कहर; बिहार में गंगा का घटता जलस्तर दे रहा राहत का संकेत

Monsoon News: उत्तर प्रदेश में मानसूनी बारिश और नदियों के उफान ने कई जिलों में बाढ़ का खतरा बढ़ा दिया है, जिससे आम जनजीवन प्रभावित हुआ है। बहराइच और कानपुर में बाढ़ का पानी रिहायशी इलाकों तक पहुंच गया, जबकि बरेली में भारी बारिश के चलते रेलवे ट्रैक भी जलमग्न हो गए। दूसरी ओर, वाराणसी, लखीमपुर खीरी और बाराबंकी में प्रशासन अलर्ट है, वहीं बिहार में गंगा का घटता जलस्तर लोगों के लिए राहत की उम्मीद लेकर आया है।

Monsoon News: नेपाल के पहाड़ी इलाकों से लगातार आ रहे पानी, बैराजों से नदियों में छोड़े गए पानी और बारिश के कारण उत्तर प्रदेश के कई जिलों में बाढ़ तथा जलभराव की स्थिति बन गई है। बहराइच, बरेली, कानपुर, वाराणसी, लखीमपुर खीरी और बाराबंकी में नदियों के बढ़ते जलस्तर ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। कई इलाकों में घरों, सड़कों और खेतों में पानी पहुंच गया है, जबकि प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और राहत सामग्री उपलब्ध कराने का काम जारी है। वहीं, बिहार में गंगा का जलस्तर घटने से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में धीरे-धीरे राहत की उम्मीद जगी है।

Monsoon 2026

यूपी और बिहार मानसून से बेहाल (AI फोटो)

बहराइच में घाघरा उफान पर, कई मजरों में घुसा पानी

बहराइच में घाघरा यानी सरयू नदी का जलस्तर कई स्थानों पर खतरे के लाल निशान से ऊपर पहुंच गया है। शारदा बैराज, घूर देवी और एल्गिन ब्रिज पर नदी खतरे के स्तर को पार कर चुकी है। नदी में छोड़े गए तीन लाख 78 हजार 800 क्यूसेक पानी के चलते एल्गिन ब्रिज पर जलस्तर खतरे के निशान से 35 सेंटीमीटर, घूर देवी में 30 सेंटीमीटर और शारदा बैराज पर 11 सेंटीमीटर ऊपर दर्ज किया गया। प्रशासन के मुताबिक अभी हालात पिछले वर्षों की तरह गंभीर नहीं हैं, लेकिन महसी और मिहींपुरवा तहसील के कई मजरों में पानी पहुंच चुका है। प्रभावित क्षेत्रों में बाढ़ चौकियां सक्रिय कर दी गई हैं और ग्रामीणों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। जरूरत पड़ने पर लोगों को निकालने के लिए एनडीआरएफ की मदद ली जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि कई घरों में पानी घुस गया है और लोग मचान या ऊंचे स्थानों पर रहने को मजबूर हैं। मुख्य मार्गों पर जलभराव से स्कूल, अस्पताल और बाजार तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। पशुओं के लिए चारे की समस्या भी सामने आई है। कतर्नियाघाट के आसपास पानी भरने से जंगल से सटे गांवों में वन्यजीवों की आवाजाही बढ़ने की आशंका ने ग्रामीणों की चिंता और बढ़ा दी है।

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