Monsoon News: नेपाल के पहाड़ी इलाकों से लगातार आ रहे पानी, बैराजों से नदियों में छोड़े गए पानी और बारिश के कारण उत्तर प्रदेश के कई जिलों में बाढ़ तथा जलभराव की स्थिति बन गई है। बहराइच, बरेली, कानपुर, वाराणसी, लखीमपुर खीरी और बाराबंकी में नदियों के बढ़ते जलस्तर ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। कई इलाकों में घरों, सड़कों और खेतों में पानी पहुंच गया है, जबकि प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और राहत सामग्री उपलब्ध कराने का काम जारी है। वहीं, बिहार में गंगा का जलस्तर घटने से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में धीरे-धीरे राहत की उम्मीद जगी है।
यूपी और बिहार मानसून से बेहाल (AI फोटो)
बहराइच में घाघरा उफान पर, कई मजरों में घुसा पानी
बहराइच में घाघरा यानी सरयू नदी का जलस्तर कई स्थानों पर खतरे के लाल निशान से ऊपर पहुंच गया है। शारदा बैराज, घूर देवी और एल्गिन ब्रिज पर नदी खतरे के स्तर को पार कर चुकी है। नदी में छोड़े गए तीन लाख 78 हजार 800 क्यूसेक पानी के चलते एल्गिन ब्रिज पर जलस्तर खतरे के निशान से 35 सेंटीमीटर, घूर देवी में 30 सेंटीमीटर और शारदा बैराज पर 11 सेंटीमीटर ऊपर दर्ज किया गया। प्रशासन के मुताबिक अभी हालात पिछले वर्षों की तरह गंभीर नहीं हैं, लेकिन महसी और मिहींपुरवा तहसील के कई मजरों में पानी पहुंच चुका है। प्रभावित क्षेत्रों में बाढ़ चौकियां सक्रिय कर दी गई हैं और ग्रामीणों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। जरूरत पड़ने पर लोगों को निकालने के लिए एनडीआरएफ की मदद ली जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि कई घरों में पानी घुस गया है और लोग मचान या ऊंचे स्थानों पर रहने को मजबूर हैं। मुख्य मार्गों पर जलभराव से स्कूल, अस्पताल और बाजार तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। पशुओं के लिए चारे की समस्या भी सामने आई है। कतर्नियाघाट के आसपास पानी भरने से जंगल से सटे गांवों में वन्यजीवों की आवाजाही बढ़ने की आशंका ने ग्रामीणों की चिंता और बढ़ा दी है।
बरेली में रिकॉर्ड बारिश, रेलवे ट्रैक तक डूबे
बरेली में मूसलाधार बारिश ने शहर की व्यवस्था को प्रभावित कर दिया है। 24 घंटे के दौरान 134.3 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो पिछले 14 वर्षों में इस अवधि के दौरान दर्ज आंकड़ों में सबसे अधिक बताई जा रही है। लगातार बारिश से बरेली जंक्शन और सिटी स्टेशन के रेलवे ट्रैक पानी में डूब गए, जिससे रेल संचालन प्रभावित हुआ। शहर के कई निचले इलाकों में जलभराव के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सरकारी कार्यालयों, थानों, बिजलीघरों और मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय तक में पानी पहुंच गया। अलखनाथ मंदिर परिसर भी जलभराव से प्रभावित हुआ है। रामगंगा नदी का जलस्तर भी बढ़ रहा है। हालांकि नदी अभी खतरे के निशान से नीचे है, लेकिन प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है। जिलाधिकारी ने नदी क्षेत्र का निरीक्षण कर अधिकारियों को बाढ़ से बचाव और सुरक्षा कार्यों में पूरी सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। नगर निगम की टीमें पंपों के जरिए जल निकासी में जुटी हैं।
कानपुर में पांडु नदी का कहर, हजारों लोग प्रभावित
कानपुर शहर और देहात के कई हिस्सों में पांडु नदी के उफान ने बाढ़ जैसे हालात पैदा कर दिए हैं। करीब 40 हजार लोग और एक हजार से अधिक घर प्रभावित बताए गए हैं। कई आवासीय इलाकों में पांच से सात फुट तक पानी भर गया, जबकि कुछ निचले घरों में पानी छह फुट तक पहुंच गया। वरुण विहार समेत कई इलाकों में लोगों को घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा। कुछ परिवारों ने छतों पर शरण ली, जबकि विस्थापित लोगों ने नहर किनारे अस्थायी ठिकाने बनाए हैं। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत शिविर शुरू किए हैं। पिपौरी गांव में 200 से अधिक घर प्रभावित हुए हैं। एनडीआरएफ ने भी बचाव अभियान चलाकर सैकड़ों लोगों को सुरक्षित निकाला। बाढ़ का असर सड़कों और संपर्क मार्गों पर भी पड़ा है। बिकरू-शिवली मार्ग पर अस्थायी पुल डूबने के कारण आवागमन बाधित हुआ है। खेतों में पानी भरने से धान और बाजरे की फसल को भी नुकसान पहुंचने की आशंका है।
वाराणसी में गंगा का पानी घटा, लेकिन निचले इलाकों में राहत नहीं
वाराणसी में गंगा का जलस्तर धीरे-धीरे कम हो रहा है, लेकिन निचले इलाकों और वरुणा नदी के आसपास अब भी जलभराव बना हुआ है। गंगा का जलस्तर चेतावनी स्तर से नीचे आ गया है, फिर भी नदी किनारे रहने वाले लोगों की मुश्किलें पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। जिले में 13 राहत शिविरों में सैकड़ों प्रभावित लोग रह रहे हैं, जहां भोजन, पानी और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। शहर के उन इलाकों में पंप लगाकर पानी निकाला जा रहा है जहां जल निकासी की व्यवस्था कमजोर है। जलभराव को लेकर स्थानीय लोगों ने निरीक्षण करने पहुंचे एक विधायक के सामने भी नाराजगी जताई।
लखीमपुर और बाराबंकी में भी नदियों की निगरानी बढ़ी
लखीमपुर खीरी में बनबसा बैराज से छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा घटने के बाद शारदा नदी का जलस्तर कुछ कम हुआ है, लेकिन पलिया पुल के पास नदी अब भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। कई गांवों और संपर्क मार्गों में पानी भरने की सूचना है। प्रशासनिक अधिकारी प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर लोगों को सहायता का भरोसा दे रहे हैं। बाराबंकी में एल्गिन ब्रिज के पास घाघरा-सरयू नदी का जलस्तर फिर बढ़ा है। नदी खतरे के निशान से करीब 29 सेंटीमीटर ऊपर दर्ज की गई। इससे तटवर्ती गांवों और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है। प्रशासन ने ग्रामीणों से सतर्क रहने और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल सूचना देने की अपील की है।
बिहार में घटने लगा गंगा का जलस्तर, राहत की उम्मीद
बिहार में भी बाढ़ की स्थिति से जूझ रहे लोगों के लिए कुछ राहत की खबर सामने आई है। उपमुख्यमंत्री और जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी के अनुसार, गंगा का जलस्तर अपने रिकॉर्ड उच्च स्तर से नीचे आने लगा है और अधिकांश नदियों में भी कमी का रुझान है। पटना के गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर 50.58 मीटर तक पहुंच गया था, जो पुराने रिकॉर्ड से अधिक था। हालांकि अब यह करीब 50.40 मीटर तक नीचे आ गया है। सरकार के मुताबिक गंगा के घटते जलस्तर से पुनपुन और दरधा जैसी नदियों की स्थिति में भी सुधार की उम्मीद है। चौधरी ने कहा कि इस बार बाढ़ का स्वरूप सामान्य वर्षों से अलग रहा और गंगा में पहले गंभीर उफान देखने को मिला। पुनपुन और दरधा नदियों ने भी रिकॉर्ड स्तर छुआ। फिलहाल विभागीय तटबंध सुरक्षित हैं और संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निगरानी की जा रही है। अधिकारियों को उम्मीद है कि यदि मौसम और नदियों की स्थिति में कोई नया बदलाव नहीं आया तो आने वाले दिनों में बिहार में बाढ़ का संकट धीरे-धीरे कम हो सकता है।
