Holi in Mathura: मथुरा में दिखे होली के अलग रंग, कहीं फूल-कहीं चप्पलों से खेली गई होली

कृष्ण नगरी मथुरा में होली का त्योहार पारंपरिक उत्साह और अनोखी परंपराओं के साथ मनाया गया। इस दौरान श्री बांके बिहारी मंदिर समेत कई मंदिरों में स्पेशल आयोजन हुए। वहीं बछगांव में 150 साल पुरानी ‘चप्पल मार’ परंपरा के साथ होली मनाई गई। जिले में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई है।

Mathura Holi Celebration: मथुरा बुधवार को होली के रंगों में सराबोर हो गया। इस दौरान भक्तों और स्थानीय लोगों ने पारंपरिक उत्साह के साथ होली मनाई। वहीं गोवर्धन तहसील के बछगांव गांव में ’चप्पल मार' होली मनाई गई। यहां सालों से होली खेलने की यह परंपरा जारी है, जिसमें गांव के बुजुर्ग बच्चों को चप्पलों से खेल-खेल में मारते हैं।

Mathura Holi

मथुरा में जूता मार होली

श्री बांके बिहारी मंदिर के सेवायत ज्ञानेंद्र किशोर गोस्वामी ने कहा कि मंदिर के बाहर होली खेली जा रही है, लेकिन गर्भगृह के अंदर नहीं मनाई जा रही है क्योंकि मंदिर का होली उत्सव होलिका दहन के दिन समाप्त हो जाता है। पुराने केशवदेव मंदिर के सेवायत बिहारीलाल गोस्वामी ने बताया कि शाम को ’भजन संध्या’ और फूलों की होली का कार्यक्रम रखा गया है। उन्होंने कहा कि उस दिन मंदिर परिसर के अंदर होली नहीं मनाई जाती है। वहीं श्री गरुण गोविंद मंदिर में सेवायत डॉक्टर राजेश गौतम ने कहा कि रंगभरी एकादशी से एक दिन पहले होली का त्योहार पारंपरिक ’हुरंगा’ के साथ समाप्त होता है।

150 साल पुरानी चप्पल मार होली परंपरा

मथुरा के बछगांव गांव में ’चप्पल’ होली मनाई जाती है। स्थानीय निवासी योगेश कुंतल ने बताया कि यह एक-दूसरे के प्रति बिना किसी द्वेष के खेलने की परंपरा है। एक अन्य ग्रामीण ने बताया कि 150 साल पुरानी यह परंपरा कभी अंग्रेजों के अत्याचारों का विरोध करने के लिए शुरू की गई थी, इस दौरान हुरियारे गुलाल उड़ाए जाते हैं और होली के गीतों पर नृत्य भी किया जाता है।

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