मुंबई : महाराष्ट्र में धर्मांतरण विरोधी कानून अब आधिकारिक तौर पर लागू होने जा रहा है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी मिलने के बाद महाराष्ट्र सरकार ने धर्म स्वातंत्र्य कानून की अधिसूचना जारी कर दी है। राज्य सरकार के मुताबिक यह कानून 28 अगस्त 2026 यानी रक्षाबंधन के दिन से पूरे महाराष्ट्र में प्रभावी होगा।
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मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कानून को रक्षाबंधन के मौके पर राज्य की ‘लाडली बहनों’ के लिए तोहफा बताया है। सरकार का कहना है कि नए कानून का मुख्य उद्देश्य महिलाओं, युवतियों और कमजोर वर्गों को बलपूर्वक, धोखे, लालच या शादी का झूठा झांसा देकर कराए जाने वाले धर्मांतरण से सुरक्षा देना है।
अपराध की श्रेणी में धर्म परिवर्तन
कानून के तहत जबरन, धोखे, प्रलोभन या विवाह के नाम पर झूठी पहचान अथवा गलत जानकारी देकर कराया गया धर्म परिवर्तन अपराध की श्रेणी में आएगा। ऐसे मामलों में आरोपियों के खिलाफ कड़ी सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
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नए कानून के तहत धर्मांतरण से जुड़े अपराधों को संज्ञेय और गैर-जमानती बनाया गया है। इसका मतलब है कि ऐसे मामलों में पुलिस बिना वारंट गिरफ्तारी कर सकती है और आरोपी को जमानत हासिल करने के लिए अदालत की प्रक्रिया से गुजरना होगा।
महाराष्ट्र सरकार ने इस कानून को कथित ‘लव जिहाद’ और पहचान छिपाकर की जाने वाली शादियों पर रोक लगाने की दिशा में भी अहम कदम बताया है। सरकार का दावा है कि कानून का मकसद किसी की धार्मिक स्वतंत्रता में हस्तक्षेप करना नहीं, बल्कि दबाव, धोखे या लालच के जरिए होने वाले धर्मांतरण को रोकना है। अधिसूचना जारी होने के साथ ही कानून को लागू करने की प्रक्रिया पूरी हो गई है और 28 अगस्त से महाराष्ट्र में नया धर्म स्वातंत्र्य कानून जमीन पर प्रभावी हो जाएगा।
