महाराष्ट्र के सत्तारूढ़ गठबंधन 'महायुति' यानी भाजपा, शिवसेना-शिंदे गुट और एनसीपी-अजित पवार गुट के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। महाराष्ट्र विधान परिषद की 5 शिक्षक और स्नातक सीटों पर हाल ही में आए चुनाव परिणामों में महायुति को लगे झटके के बाद भारतीय जनता पार्टी और एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना के बीच दरारें अब खुलकर सामने आने लगी हैं। बीजेपी के राज्य मुख्य प्रवक्ता नवनाथ बन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक तीखा पोस्ट साझा कर सीधे अपनी सहयोगी पार्टी शिवसेना के नेतृत्व और रुख पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि शिवसेना की भितरघात और गठबंधन धर्म न निभाने के कारण महायुति को तीन सीटें गंवानी पड़ीं।
भाजपा प्रवक्ता नवनाथ बन (चित्र साभार: @NavnathBanBJP)
'पुणे में ऐन वक्त पर निर्दलीय को समर्थन, नागपुर-संभाजीनगर में भी धोखा'
विधान परिषद चुनाव के नतीजों का विस्तृत विश्लेषण करते हुए नवनाथ बन ने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान महायुति का हिस्सा होने के बावजूद शिवसेना ने पुणे और नागपुर में अपेक्षित सहयोग नहीं दिया।
नवनाथ बन ने 'X' पर अपनी पोस्ट में लिखा, कि टीचर्स और ग्रेजुएट्स चुनाव क्षेत्रों के चुनावों में, सहयोगी पार्टी शिवसेना ने पुणे और नागपुर में उम्मीद के मुताबिक सहयोग नहीं दिया। पुणे में, आखिरी समय में सचिन सानप को समर्थन देकर, शिवसेना ने महायुति गठबंधन की एकता को ही झटका दिया। उन्हें जो वोट मिले, वे ग्रेजुएट्स चुनाव में BJP को नहीं मिले थे। इस बीच, छत्रपति संभाजी नगर में, अब्दुल सत्तार ने तो सीधे नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी के खिलाफ कैंपेन किया। उसका भी असर हुआ।
'एक सीट के लालच में गंवाया मौका'
बीजेपी प्रवक्ता ने शिवसेना के वरिष्ठ नेता व पूर्व मंत्री अब्दुल सत्तार पर महायुति के अधिकृत उम्मीदवार के खिलाफ प्रचार करने का सीधा आरोप जड़ा। उनका कहना है कि यदि शिवसेना गठबंधन धर्म का ईमानदारी से पालन करती तो महायुति पांचों की पांचों सीटें आसानी से जीत सकती थी। नवनाथ बन ने आगे लिखा, कि अगर शिवसेना ने BJP और नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी के साथ सहयोग करके महायुति गठबंधन के सिद्धांतों को बनाए रखा होता, तो महायुति सभी पांच सीटें जीत जाती। लेकिन, पुणे में एक सीट के लालच में, शिवसेना ने अपनी सहयोगी पार्टियों को मुश्किल में डाल दिया और तीन सीटें जीतने का मौका गंवा दिया। एक सीट के लिए सहयोगी पार्टियों को नुकसान पहुंचाने वाला रुख अपनाना महायुति के हित में नहीं है।
क्या रहे चुनाव के नतीजे?
5 सीटों पर हुए इन चुनावों में विपक्षी महाविकास अघाड़ी (MVA) ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 3 सीटों पर जीत दर्ज की, जो नागपुर स्नातक, पुणे स्नातक और छत्रपति संभाजीनगर हैं, जबकि महायुति केवल 2 सीटों, पुणे शिक्षक और अमरावती शिक्षक पर ही सिमट कर रह गई। बीजेपी के पारंपरिक गढ़ नागपुर में कांग्रेस के अभिजित वंजारी ने जीत दर्ज की। एनसीपी (शरदचंद्र पवार) की हर्षदा देशमुख-जाधव ने पुणे में बीजेपी प्रत्याशी को हराया। छत्रपति संभाजीनगर में अब्दुल सत्तार के खुलकर विरोध के चलते महायुति समर्थित उम्मीदवार को हार का सामना करना पड़ा। नतीजों के तुरंत बाद बीजेपी के मुख्य प्रवक्ता द्वारा सीधे मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उनकी पार्टी पर किए गए इस सीधे हमले ने महाराष्ट्र की सियासत में हलचल पैदा कर दी है।
