शिवलिंग की पूजा तो सभी करते हैं, यहां भगवान शिव की नाभि की पूजा होती है, 16 किमी चलकर जाना पड़ता है इस शिवालय में

भगवान शिव के बारे में कहा जाता है कि वह एक लोटे जल से ही प्रसन्न हो जाते हैं। लेकिन उनके भक्त उनके लिए हर तरह का कष्ट सहन करके उनके शिवालयों तक पहुंचते हैं। ऐसा ही एक शिवालय मद्यमहेश्वर है, जहां पहुंचने के लिए आपको 16 किमी का ट्रैक करना पड़ता है।

भगवान शिव के भक्तों के लिए भोले बाबा ही सब कुछ हैं। भोले भंडारी के अलावा उन्हें कुछ भी नहीं भाता। भगवान शिव के ऐसे ही भक्त, पंच केदार (Panch Kedar) के दर्शनों के लिए पहुंचते हैं। पंच केदार की बात होती है तो आमतौर पर लोग केदारनाथ (Kedarnath) के बारे में तो जानते हैं, लेकिन बाकी के चार केदारों के बारे में कम ही लोगों को जानकारी होती है। पंच केदार में हम तुंगनाथ (Tungnath) और रुद्रनाथ (Rudranath) के दर्शन पूर्व में कर चुके हैं। तुंगनाथ में शिव शंकर के दर्शन करने के बाद हमने 20 किमी का कठिन ट्रैक करके रुद्रनाथ के दर्शन कर लिए हैं। आज चलते हैं मधमहेश्वर (Madmaheshwar) के मंदिर, जहां भगवान शिव की नाभि की पूजा होती है। मधमहेश्वर में भगवान शिव के दर्शन करने के साथ ही आप यहां से अद्भुत नजारे हमेशा के लिए अपनी यादों में संजोकर ही घर जाएंगे।

Madhmaheshwar Panch Kedar.

पंचकेदार सर्किट में मधमहेश्वर मंदिर

मधमहेश्वर आने पर दाईं ओर जहां आपको बर्फ से ढकी हिमालय की चोटियां नजर आएंगी, वहीं बाईं ओर घास के खूबसूरत मैदान आपका मन मोह लेंगे। वहीं मंदिर के पीछे की तरफ घना जंगल अपनी ओर आकर्षित करता है।

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