लखनऊ: यूपी में प्रदेश में संचालित मदरसों में आ रही विदेशी फंडिंग के दुरुपयोग की गहनता से जांच होगी। शिक्षा के लिए विदेशों से आ रही रकम से भारत विरोधी व अवैध मतांतरण जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिए जाने के संदेह से एटीएस चौकन्ना है। पिछले दिनों सहारनपुर और वाराणसी से संदिग्ध बांग्लादेशी पकड़े गए थे, जो सिंडिकेट के जरिए करोड़ों की फंडिग लेकर भारत के खिलाफ साजिशें रच रहे थे।
यूपी के मदरसों के विदेशी फंडिंग की होगी जांच
नेपाल सीमा से सटे जिलों में बढ़े मदरसे
दरअसल, पिछले कुछ समय से नेपाल सीमा से सटे जिलों में मदरसों की संख्या तेजी से बढ़ी है, जो आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरे की आशंका को बढ़ाती है। इसी खतरे को देखते हुए सीएमरी योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर मदरसों को हो रही विदेशी फंडिंग के दुरुपयोग की जांच के निर्देश दिए गए हैं। एडीजी एटीएस (आतंकवाद निरोधक दस्ता) मोहित अग्रवाल की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन कर दिया गया है। ऐसे में अवैध तरीके से चल रहे मदरसों के संचालकों में हड़कंप की स्थिति हैं।यूपी में 16,513 मान्यता प्राप्त और 8,500 गैर मान्यता प्राप्त मदरसे
एसआईटी जांच टीम में एसपी साइबर क्राइम प्रो. त्रिवेणी सिंह व अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की निदेशक जे. रीभा बतौर सदस्य शामिल हैं। यूपी में चार हजार से अधिक गैर मान्यता प्राप्त मदरसों को विदेशी फंडिंग की जानकारी निकलने पर जांच के आदेश दिए गए हैं। यूपी में 16,513 मान्यता प्राप्त और करीब 8,500 गैर मान्यता प्राप्त मदरसे संचालित हैं। सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी सभी 25 हजार मदरसों में हो रही फंडिंग की सिलसिलेवार जांच कर कार्रवाई करेगी। सभी मदरसों को नोटिस देकर फारेन करेंसी अकाउंट के माध्यम से हो रहे लेनदेन का ब्यौरा मांगा जाएगा।
एक अधिकारी ने बताया कि नेपाल सीमा से सटे बलरामपुर, सिद्धार्थनगर, श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी और पीलीभीत के अलावा आसपास के कुछ अन्य जिलों में पांच सौ से एक हजार तक मदरसे संचालित हैं। नेपाल सीमा से सटे जिलों में बीते कुछ वर्षों में इनकी संख्या तेजी से बढ़ी है। यही कारण है कि सरकार ने ये कदम उठाया है।
