उत्तर प्रदेश सरकार ने अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और OBC वर्ग के युवाओं को सिविल सेवा और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता दिलाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित परीक्षा पूर्व प्रशिक्षण केंद्र इन युवाओं को उच्च स्तरीय कोचिंग प्रदान कर रहे हैं, जिससे वे IAS और PCS जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाओं में सफलता हासिल कर सकें।
योगी सरकार की कोचिंग की पहल ला रही रंग (फोटो - PTI)
अब तक इस योजना के अंतर्गत 701 कैंडिडेट्स का चयन हो चुका है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए सरकार ने 11.24 करोड़ रुपये का बजट तय किया है, जो उसकी समावेशी विकास की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इन केंद्रों में प्रिलिम से लेकर इंटरव्यू तक हर स्तर पर आधुनिक पाठ्यक्रम और विशेषज्ञों का मार्गदर्शन मिलता है। खासतौर पर लखनऊ में महिला समर्पित केंद्र, बालिकाओं को सशक्त बनाने की दिशा में अहम पहल साबित हो रहा है।
यह योजना केवल प्रशिक्षण और एजुकेशन तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं को प्रशासनिक सेवाओं में अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर भी प्रदान कर रही है। वर्ष 2017-18 से अब तक 6784 से अधिक अभ्यर्थी लाभान्वित हुए हैं। इनमें से 48 उम्मीदवारों का चयन संघ और राज्य लोक सेवा आयोग में हुआ है, जबकि 653 अन्य परीक्षाओं में सफल हुए हैं। कोविड काल में भी ऑनलाइन क्लास के जरिए तैयारी जारी रखी गई, जिसके बाद 81 कैंडिडेट्स ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की।
प्रदेश में संचालित आठ प्रमुख प्रशिक्षण केंद्रों में लखनऊ का श्री छत्रपति शाहू जी महाराज शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान, प्रयागराज का न्यायिक सेवा केंद्र, वाराणसी का संत रविदास आईएएस-पीसीएस केंद्र और अन्य जिलों के अंबेडकर व राजकीय कोचिंग केंद्र शामिल हैं।
यह योजना उन अभ्यर्थियों के लिए है, जिनके अभिभावकों की वार्षिक आय 6 लाख रुपये तक है। वास्तव में यह प्रयास सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के युवाओं को अवसर और शिक्षा के माध्यम से नई पहचान देने की दिशा में एक मजबूत कदम है।
