Mowgli Pathshala: यूपी में जंगल से सटे इलाकों में सैकड़ों बच्चों का भविष्य संवार रही 'मोगली पाठशाला'

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  • Updated Apr 9, 2023, 06:30 PM IST

Mowgli Pathshala: यूपी में कतर्नियाघाट वन्य जीव अभयारण्य में वन विभाग और सामाजिक संगठनों के सहयोग से मोगली पाठशाला चलाई जा रही है। अपनी तरह की इस अनूठी पाठशाला से जंगल से सटे रिहायशी इलाकों में रहने वाले बच्चों की जिंदगी में तालीम की रोशनी ला रही है। ब्रिटिश लेखक रुडयार्ड किपलिंग के उपन्यास ‘द जंगल बुक’ का पात्र ‘मोगली’ जब 1990 के दशक में जापानी टीवी एनीमेशन सीरीज ‘द जंगल बुक शोनेन मोगली’ में जीवंत होकर उभरा तो उसका किरदार लोगों में खूब मशहूर हुआ था।

Mowgli Pathshala: यहां के कतर्नियाघाट वन्य जीव अभयारण्य में वन विभाग और सामाजिक संगठनों के सहयोग से चलाई जा रही ‘मोगली पाठशाला’ जंगल से सटे रिहायशी इलाकों में रहने वाले बच्चों की जिंदगी में तालीम की रोशनी ला रही है। अपनी तरह की इस अनूठी पाठशाला में बच्चों को प्रोजेक्टर, लैपटॉप, टैबलेट, मोबाइल, टीवी स्क्रीन वगैरह पर दिलचस्प एवं मनोरंजक ढंग से आधुनिक शिक्षा दी जा रही है। साथ ही उनकी निरंतर काउंसिलिंग कर उन्हें सामान्य शिक्षा के साथ जंगल एवं प्रकृति के महत्व, जंगल से उनके रिश्ते तथा जानवरों के बारे में बताते हुए जंगल से दोस्ती का पाठ पढ़ाया जा रहा है। ब्रिटिश लेखक रुडयार्ड किपलिंग के उपन्यास ‘द जंगल बुक’ का पात्र ‘मोगली’ जब 1990 के दशक में जापानी टीवी एनीमेशन सीरीज ‘द जंगल बुक शोनेन मोगली’ में जीवंत होकर उभरा तो उसका किरदार लोगों में खूब मशहूर हुआ था।

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Mowgli Pathshala: मोगली पाठशाला के जरिेये बच्चों को पढ़ाया जा रहा है

इस अनूठी पाठशाला के संचालन में अहम भूमिका निभा रहे प्रभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) आकाशदीप बधावन ने रविवार को बताया कि वन्य क्षेत्रों और उसके आस-पास बहुत से समुदाय रहते हैं जिनका जीवन जंगल पर निर्भर है और ये कहीं न कहीं हाशिए पर रह रहे समाज से आते हैं। अभयारण्य के मोतीपुर और बर्दिया क्षेत्र में संचालित दो मोगली स्कूलों में इन इलाकों के करीब 350 बच्चे अध्ययनरत हैं। अभी हम इसे एक ट्यूशन सेंटर की तरह संचालित कर रहे हैं। फिर भी हमारे यहां मोतीपुर में लगभग 150 और बर्दिया में करीब 200 बच्चे पढ़ने आते हैं। उन्होंने बताया कि जंगल से सटे रिहायशी इलाकों के ये बच्चे कभी लकड़ी बीनने तो कभी खेल-खेल में घने जंगल में चले जाते थे। कभी कभार इनका खतरनाक वन्यजीवों से सामना होता था। अब मोगली स्कूल में जाने वाले बच्चे इन सबसे बचे हुए हैं। बच्चों के माता-पिता भी जागरूक हो रहे हैं और उनका भी हमें खूब समर्थन मिल रहा है।

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