लखनऊ: राजधानी स्थित चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट भारत के टॉप हवाई अड्डों में शुमार हो गया है। इसे बेहतरीन सुविधाओं से लैस किया जा रहा है। हालांकि, अभी यहां से कई बाहरी देशों के लिए फ्लाइट उपलब्ध नहीं हैं। खासकर, अमेरिका और यूके की सीधी हवाई यात्रा अभी सपना है। एयरपोर्ट के विस्तार के लिए बिजनौर की ओर भूमि अधिग्रहण और कब्जा मुक्त कराने के लिए अधिकारियों ने शासन को पत्र भेजा था, लेकिन शासन स्तर पर यह काम अभी लंबित है। अब टर्मिनल-3 बनने के बाद लखनऊ एयरपोर्ट प्रशासन फिर से रनवे विस्तार की बाधाओं को दूर करने के लिए शासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर इसका हल निकालने का प्रयास करेगा।
लखनऊ हवाई अड्डा
3500 मीटर लंबे रनवे की जरूरत
अभी लखनऊ हवाई अड्डे की लंबाई 2744 मीटर है। फिलहाल, रनवे पर फुल ट्रैफिक है। लिहाजा, पूरी क्षमता के साथ 777 ड्रीम लाइनर, बोइंग 747, एयर बस 330, एयर बस 380 जैसे विमानों की लैंडिंग नहीं हो पाती है। हालांकि, इसका मुख्य कारण अधिक वजन होना बताया जा रहा है। ऐसे में इन भारी भरकम फ्लाइट को सुरक्षित लैंडिंग के लिए चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का टर्मिनल-3 एयरपोर्ट प्रशासन 3500 मीटर लंबे रनवे की जरूरत है। रनवे का विस्तार कानपुर रोड की तरफ करने का भी प्रस्ताव बना था।2019 से लंबित है कार्य
लखनऊ से अमेरिका और लंदन के लिए सीधी विमान सेवा शुरू करने की घोषणा 14 फरवरी 2019 को लखनऊ एयरपोर्ट पर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने की थी। पांच साल में लखनऊ एयरपोर्ट पर करीब 2400 करोड़ रुपये से टर्मिनल 3 तो बन गया, लेकिन रनवे का विस्तार न होने के कारण अब तक इन देशों को सीधी उड़ान शुरू नहीं हो सकी। वर्ष 2017 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शपथ ग्रहण समारोह में लोड पैनाल्टी के साथ एक बोइंग 747 को उतारा गया था। लोड पैनाल्टी में विमान में यात्रियों की संख्या और वजन को कम किया जाता है। इसके सामने जमीन के अधिग्रहण और अतिक्रमण की दिक्कत आ रही है। फिलहाल, एयरपोर्ट प्रशासन मौजूदा रनवे को चौड़ा करने और उसको मजबूत करने के साथ तीन टैक्सी वे एरिया बनाकर उसे टर्मिनल-3 से जोड़ने के लिए 18 अप्रैल से काम शुरू करेगा। इस कारण रात 10 से सुबह छह बजे तक उड़ानें ठप रहेंगी।
