Lucknow Sitapur 4 Lane Highway Route Map : उत्तर प्रदेश में सड़क यातायात को मजबूत बनाने के उद्देश्य से हाईवे और एक्सप्रेसवे परियोजनाओं पर कार्य चल रहा है। देश में सबसे अधिक एक्सप्रेसवे वाला राज्य (15 एक्सप्रेसवे) होने के साथ प्रदेश में नए हाईवे बनाने की कवायत तेज हो गई है। कई परियोजनाओं का निर्माण कार्य चल रहा है तो कई प्रस्तावित हैं। इनमें से कईयों के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू है, जो संबंधित किसानों के लिए बेहद लाभकारी साबित होगी। इनमें से ही एक है लखनऊ-बाराबंकी-सीतापुर राजमार्ग। इस सड़क मार्ग के विकसित होने से संबंधित जिलों के वाहन चालकों के साथ अन्य मार्गों से कनेक्टिविटी करना आसान होगा। खासकर, राजधानी आवागमन करने वाले लोगों को काफी सहूलियत होगी। आइये जानते हैं इसके रूट में कौन से गांव पड़ेंगे और जमीन खरीद के बदले कितना मुआवजा निर्धारित किया गया है?
लखनऊ-बाराबंकी-सीतापुर हाईवे के गांव
राजधानी लखनऊ, बाराबंकी और सीतापुर को जोड़ने वाले इस नए 4 लेन हाईवे मार्ग तीनों जिलों को बड़ा लाभ होगा। यह 69 किलोमीटर लंबा मार्ग चिनहट (लखनऊ) से शुरू होकर उधर बाराबंकी तक सफर आसान करेगा। फिलहाल इस राजमार्ग के लिए मंजूरी मिल गई है। लखनऊ के कुर्सी रोड और अयोध्या लखनऊ किसान पथ मार्ग के सीतापुर व लखीमपुर खीरी और बहराइच तक यातायात दबाव को कम करने में मददगार साबित होगा।
लखनऊ, बाराबंकी और सीतापुर हाईवे जमीन अधिग्रहण
लखनऊ, बाराबंकी और सीतापुर तक विकसित होने वाले इस हाईवे मार्ग के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसके लिए 660 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं, जिसमें से जमीन मालिकों को बतौर मुआवजा बड़ी रकम दी जाएगी, जिससे उनकी आर्थिक समृद्धि होगी। इस परियोजना के जरिए औद्योगिक क्षेत्र, देवा और तहसील फतेहपुर को जोड़ते हुए घाघरा के तटवर्ती भाग महमूदाबाद सीतापुर तक जाना काफी सुगम हो जाएगा। प्रस्तावि हाईवे नेशनल हाईवे-727 से चहलारी घाट बहराइच से कनेक्ट होगा। इस रूट की डीपीआर में तीन बाईपास के साथ 7 पुलों का निर्माण प्रस्तावित है।
देवा से फतेहपुर तक फोरलेन निर्माण को जल्द पूरा करने पर जोर है। संबंधित खंड में लगभग 20 किलो मीटर में 660 करोड़ रुपये खर्च होंगे। डीपीआर के अनुसार देवा से चलकर मार्ग सलारपुर, विशुनपुर, इसरौली, बसारा और रसूलपुर पनाह औद्योगिक क्षेत्र से गुजरते हुए फतेहपुर तक पहुंचेगा। 16 गांव फोरलेन से जुड़ जाएंगे। किसानों की 85 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण पूरा कर लिया गया है। दो हजार से अधिक किसानों को मुआवजा प्रक्रिया से जोड़ा गया है।
| परियोजना | परियोजना विवरण |
| परियोजना | लखनऊ, बाराबंकी-सीतापुर |
| लखनऊ, बाराबंकी-सीतापुर हाईवे | 660 करोड़ रुपये |
| लखनऊ, बाराबंकी-सीतापुर हाईवे लेन संख्या | 4 |
| हाईवे की शुरुआती बिंदु | चिनहट (लखनऊ) |
| हाईवे का आखिरी बिंदु | एनएच-27 चहलारी घाट (बहराइच) |
| लखनऊ, बाराबंकी-सीतापुर हाईवे पर पुल | 4 |
| निर्माणकर्ता एजेंसी | एनएचएआई |
| परियोजना पूरा होने की तिथि | निर्धारित नहीं |
किन कस्बों को होगा फायदा
कुर्सी, बेहडपुरना, मित्तई, खेवली, भिटौली, देवा, सिपहिया, गोपलपुर, गुरगुज, बेलहा, करौंदा, ग्वारी, खेवली, शाहपुर, गौरिया, मैनाहार, कैथी, सरैय्या, सरकौन बरेठी, तिन्दोला, दुन्दपुरवा, नगर, खजूरगांव, भडरिया, रानीगंज, पहाड़पुर, हडौरी, बस्ती और माती समेत आसपास के कस्बों को सहूलियत होगी।
प्रोजेक्ट के तहत तीन नगरों के लिए बाइपास निर्धारित किए गए हैं। विशुनपुर में दो किलोमीटर और फतेहपुर में करीब तीन किमी. बाइपास रेलवे क्रासिंग और बाजार के आसपास लगने वाले जाम से राहत मिलेगी। जानकारी के मुताबिक, कल्याणी नदी और शारदा सहायक नहर पर चार नए पुल बनाए जाने हैं। जमीन अधिग्रहण और सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद जल्द ही परियोजना का कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
यह 69 किलोमीटर हाईवे राजधानी लखनऊ तक अन्य मार्गों पर बढ़ते यातायात बोझ को कम करने के लिहाज से काफी अहम होगा। यह किसान मार्ग पथ से जुड़कर लखनऊ से सीधा संपर्क स्थापित करेगा। साथ ही राजधानी समेत आसपास के जिलों के लिए वैकल्पिक रूट के तौर पर काफी कारगर साबित होगा और अक्सर लगने वाली वाहनों की लंबी कतारों से छुटकारा मिलेगा, जिससे लोगों कम समय में अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे।
देवा बाइपास के निर्माण को मंजूरी
वहीं, चिनहट से देवा और कुर्सी को जोड़ने वाला मार्ग भी फोरलेन में कनवर्ट किया जाएगा। यह मार्ग किसान पथ से जुड़कर लखनऊ से सीधा कनेक्टिविटी देगा। 27 किलोमीटर लंबे इस खंड के चौड़ीकरण एवं मरम्मतीकरण कार्य की लागत 468.48 करोड़ रुपये तय की गई है। यहां देवा बाइपास के निर्माण को मंजूरी दी गई है। वहीं, देवा से फतेहपुर तक 20 किलोमीटर और सीतापुर से महमूदाबाद 22 किलोमीटर तक फोरलेन निर्मित किया जाएगा।
यह कॉरिडोर तीनों जिलों के बीच आर्थिक विकास का जरिए बनेगा। खासकर, लखनऊ में सरकारी कार्य, बाराबंकी में कृषि व्यापार और सीतापुर की ओर औद्योगिक विकास को गति मिलेगी। इस हाईवे के खुलने से संबंधिक जिलों के रूट के आसपास लोगों के लिए नए रोजगार के साधन बनेंगे, जिनमें होटल, रेस्टोरेंट, वाहन की मरम्मत संबंधी दुकानों के अलावा औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी।
