अभी भगवान गौतम बुद्ध से है पहचान, अब आपके खाने का जायका बढ़ाएगा कुशीनगर

भगवान बुद्ध की नगरी कुशीनगर को एक और पहचान मिलने वाली है। अब यहां के मसालों की खुशबू दुनियाभर में महकेगी। अब यहां मेथी, सौंफ, जीरा, अजवाइन के फ्लेवर औषधीय गुणों के मसालों की खेती की जाएगी।

Kushinagar: सत्य और अहिंसा के लिए पहचाने जाने वाली भगवान बुद्ध की परिनिर्वाण स्थली कुशीनगर को एक और पहचान मिलने वाली है। दुनिया को आलोकित करने वाली यह धरती, आने वाले समय में यहां उपजने वाली मसालों की खुशबू से भी पहचानी जाएगी। यहां के मसालों से भारतीय किचन तो सुगंधित होंगे ही दुनिया के किचन में भी कुशीनगर के मसाले महकेंगे। अब आपके खाने का जायका बढ़ाएगा कुशीनगर शान बढ़ांएंगे। इतना ही नहीं, कुशीनगर की धरती पर साल से उपजने वाली हल्दी को भी दुनियाभर में पहचान मिलेगी। अब कुशीनगर की उर्वर भूमि पर न सिर्फ हल्दी की अच्छी फसल होगी बल्कि जीरा, सौंफ, मंगरैल और अजवाइन की खेती को भी नई पहचान मिलने वाली है।

Kushinagar

अब मसालों से होगी कुशीनगर की पहचान

हल्दी की खेती पुरानी

अब राष्ट्रीय बीजीय मसाला अनुसंधान केंद्र (अजमेर) ने मसालों की खेती के लिए सहयोग करने की हामी भर दी है। इस साल रबी की फसली सीजन में सीमित संख्या में किसानों से मसाले की कई प्रजातियों की खेती शुरू कराने की योजना है। कृषि विज्ञान केंद्र कुशीनगर के प्रभारी अशोक राय के अनुसार कुशीनगर में हल्दी की खेती की परंपरा पुरानी है। कुशीनगर और आसपास की जलवायु बीजीय मसालों के लिए भी अनुकूल है। इसलिए यहां इसकी संभावना है। किसान भी जागरूक हैं। अधिक लाभ वाले मसालों की खेती की संभावना बेहतर है।

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