आपने झारखंड के हजारीबाग का नाम तो जरूर सुना होगा। यह शहर कई चीजों के लिए मशहूर है। हजारीबाग जिला उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल के उत्तर पूर्व भाग में स्थित है। हजारीबाग के उत्तर में गया और कोडरमा, पूर्व में गिरिडीह और बोकारो, दक्षिण में रामगढ़ और पश्चिम में चतरा शामिल हैं। यहां हजारीबाग के मुख्य पहाड़ों में चंदवारा और जिल्लिंजा हैं और इनकी ऊंचाई 2816 और 3057 फीट है। यहां की नदियों की बात की जाए तो यहां दामोदर और भराकर नदियां बहती हैं। यह शहर कई मायनों में खास है। इसकी स्थापना साल 1833 में हुई थी। आपको बता दें कि यह 4,313 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। साल 2011 की जनगणना के अनुसार यहां की कुल जनसंख्या 1,734,495 है। आइए आज हजारीबाग के इतिहास और इसके नाम की कहनी से आपको रूबरू कराते हैं।
झारखंड का हजारीबाग
कैसे पड़ा हजारीबाग का नाम ?
झारखंड के हजारीबाग के नाम के बारे में कहा जाता है कि इसका नाम दो गांवों के नाम से मिलकर पड़ा है। जिसे ओकनी और हाजारी नाम से जाना जाता है। ऐसा भी कहा जाता है कि यहां आम्र के हजारों पेड़ थे, जिस वजह से इसे हजारीबाग कहा जाता है। हजारीबाग शहर के नाम पर ही इसका नाम पड़ा है। ओकनी और हजारी दोनों गांवों के निकट फौज के ठहराव का फैसला लिया गया था।
यहां बुद्ध का हुआ था आगमन
ऐसा कहा जाता है कि महाभारत काल में पौण्ड्र, पौण्ड्रिक और कर्क खंड इत्यादि कीकट प्रदेश घोषित किए गए थे। कीकट प्रदेश हजारीबाग का ही हिस्सा था। यह हजारीबाग के वर्तमान गिरिडीह क्षेत्र में ईसा पूर्व 8वीं शताब्दी में जैनों के 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ पहाड़ी के सम्मेद शिखर पर निर्वाण प्राप्त किया था। महात्मा बुद्ध ने यहीं तपस्या की थी। हजारीबाग की सीतागढ़ पहाड़ी, बुढ़वा महादेव, इटखोरी, चतरा और हजारीबाग के अनेक स्थलों पर बुद्धविहार के अवशेष प्राप्त हुए हैं, जो बताती है कि बुद्ध का यहां आए थे।
हजारीबाग से गुजरे थे शेरशाह!
कहा जाता है कि शेरशाह बंगाल की राजधानी गौड़ पर दूसरे आक्रमण के दौरान 1538 ई. में झारखंड होकर आए थे। वह रोहतासगढ़ जाने के दौरान झारखंड के जंगलों से होकर गुजरे थे। माना जाता है कि वह उस समय हजारीबाग के रास्ते से ही गए होंगे।
हजारीबाग का इतिहास
ऐसा भी माना जाता है कि अकबर ने अपने शासनकाल में झारखंड को अपने सूबे का हिस्सा बनाया था। इब्राहिम खां फतहा ने कुकराह पर आक्रमण किया। जिसके बाद साल 1605 में अकबर की मृत्यु के पश्चात यह आजाद हो गया। लेकिन इब्राहिम खां ने छोटानागपुर के 46वें राजा दुर्जन साल को परास्त कर पटना के गर्वनर को छोटानागपुर जागीर के रूप में दिया था।
हजारीबाग की स्थापना
साल 1831 ई. में कोल विद्रोह हुआ था। कोल विद्रोह के दमन के पश्चात शासन प्रणाली में परिवर्तन नहीं हुआ। नियम के अनुसार रामगढ़, खडगडीहा, दक्षिण-पश्चिम सीमान एजेंसी को मिलाकर हजारीबाग को प्रशासनिक मुख्यालय बनाया गया था। रांची इसका मुख्यालय बनाया गया। साल 1854 ई. में इसका शासन बंगाल के लेफ्टिनेंट गवर्नर के अधीन था। 1834 ई. में ही रामगढ़ का प्रशासनिक मुख्यालय चतरा से हटाकर हजारीबाग कर दिया गया था। हजारीबाग में 1869 ई. के पहले तक सैनिक छावनी थी।
