चोल साम्राज्य से लेकर ब्रिटिश राज तक...वो भारतीय शहर जिसकी धरती उगलती थी सोना, जानें आखिर कैसे हो गया वीरान?

प्राचीन भारत को सोने की चिड़िया कहा जाता था, लेकिन इस चिड़िया के पंखों को कई आक्रमणकारी अपने-अपने देश काटकर, लूटकर और तोड़कर लेकर चले गए। लेकिन भारत में एक ऐसी भी जगह थी जिसकी धरती ने 21वीं सदी तक सोना उगला। जिस केजीएफ की बात साउथ की लोकप्रिय फिल्म में की गई वो सिर्फ एक कल्पना मात्र नहीं बल्कि एक हकीकत है जिससे आप शायद ही रूबरू होंगे। आज हम आपको भारत के उस शहर के बारे में बताने जा रहे हैं जिसके स्वर्ण युग का इतिहास चोल साम्राज्य से लेकर ब्रिटिश राज तक रहा।

Kolar Gold Fields History: हजारों सालों से भारतीय सरजमीन को सोने की चिड़िया इसलिए कहा जाता था क्योंकि उस दौर में भारत सोना, रत्न, मसाले और अन्य प्राकृतिक संसाधनों से अत्यंत समृद्ध था। वैश्विक व्यापार और अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी इतनी अधिक थी कि उसकी GDP ब्रिटेन, जापान और अमेरिका जैसे देशों से भी कहीं ऊपर मानी जाती थी। यही समृद्धि कई विदेशी आक्रमणों का मुख्य कारण बनी। महमूद गजनवी और नादिर शाह जैसे आक्रमणकारियों ने बार-बार भारत पर हमले किए और इसकी अपार संपत्ति को लूटा। बाद में अंग्रेजों के शासन काल में भी भारत की आर्थिक रीढ़ को कमजोर किया गया।

​Kolar Gold Fields History​

आखिर कहां मौजूद है आज की KGF

वर्षों की मेहनत से अर्जित धन-संपत्ति विदेशी तिजोरियों में चली गई। हालांकि, भारत की भूमि आज भी अपनी कोख में ऐतिहासिक खजाने समेटे हुए है। ऐसा ही एक नाम है कोलार गोल्ड फील्ड्स (KGF) का है, जो कि कर्नाटक के कोलार शहर में स्थित है। यह क्षेत्र भारत की सबसे पुरानी और सबसे गहरी सोने की खदानों में से एक माना जाता है। KGF की चर्चा सबसे अधिक उस समय में हुई जब 2018 में कन्नड़ भाषा की ब्लॉकबस्टर फिल्म “केजीएफ” रिलीज हुई। हालांकि फिल्म ने इस जगह को फिक्शनल रूप में दर्शाया लेकिन असलियत में यह जगह वर्षों से भारत के स्वर्ण इतिहास का प्रतीक रही। तो अगर आप भी इस शहर को केवल एक फिल्मी कल्पना मानते हैं तो जान लीजिए केजीएफ एक हकीकत है, जहां से देश को वर्षों तक बड़ी मात्रा में सोना प्राप्त होता रहा है। आइए, आगे जानते हैं कोलार गोल्ड फील्ड्स से जुड़ी कुछ रोचक और ऐतिहासिक जानकारियां।

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