नाबालिग रेप पीड़िता की 30 हफ्ते की प्रेग्नेंसी खत्म करने की अनुमति, केरलम HC ने दी मेडिकल टर्मिनेशन की इजाजत

केरलम हाईकोर्ट ने यह आदेश किशोरी की जांच के लिए गठित चिकित्सकीय बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर जारी किया। बोर्ड ने राय दी कि गर्भपात ही सबसे उपयुक्त विकल्प है, क्योंकि गर्भावस्था जारी रहने से यौन उत्पीड़न का शिकार हुई इस नाबालिग पीड़िता के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ेगा।

केरलम उच्च न्यायालय ने दुष्कर्म पीड़िता 15 वर्षीय एक किशोरी की मां की याचिका पर सुनवाई करते हुए उसके 30 सप्ताह के गर्भ को चिकित्सकीय रूप से समाप्त करने की अनुमति दे दी है। न्यायमूर्ति हरिशंकर वी मेनन ने पीड़िता की मां द्वारा दायर याचिका को स्वीकार करते हुए राज्य सरकार को इस प्रक्रिया के लिए आवश्यक इंतजाम करने का निर्देश दिया।

Pregnancy Termination Kerlam HC

(सांकेतिक फोटो-Istock)

अदालत ने यह आदेश किशोरी की जांच के लिए गठित चिकित्सकीय बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर जारी किया। बोर्ड ने राय दी कि गर्भपात ही सबसे उपयुक्त विकल्प है, क्योंकि गर्भावस्था जारी रहने से यौन उत्पीड़न का शिकार हुई इस नाबालिग पीड़िता के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ेगा।

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