Kedarnath Temple Opening 2026: भीमशिला केदारनाथ धाम की एक अत्यंत पवित्र और प्रसिद्ध शिला मानी जाती है, जिसे श्रद्धालु “भगवान का पत्थर” या “दिव्य सुरक्षा कवच” के नाम से भी जानते हैं। यह पवित्र चट्टान मंदिर के ठीक पीछे स्थित है और विशेष रूप से 2013 की विनाशकारी बाढ़ के दौरान केदारनाथ मंदिर की रक्षा करने के कारण “चमत्कारी शिला” के रूप में प्रसिद्ध हुई। भक्तों का मानना है कि यह शिला बाबा केदार की दिव्य शक्ति और उनकी महिमा का प्रतीक है।
सख्त नियमों और नई व्यवस्था के बीच खुलेंगे केदारनाथ धाम के कपाट
सुबह 8 बजे वृष लग्न में होंगे दर्शन
केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल 2026 को सुबह 8 बजे वृष लग्न में श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे। बदरी-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने मार्च 2026 में इस संबंध में नई एसओपी जारी की थी और अप्रैल में कपाट खुलने से पहले सभी तैयारियों को पूर्ण कर लिया गया है। 21 अप्रैल तक बाबा की डोली धाम पहुंच चुकी थी और अग्रिम टीम ने अंतिम व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दे दिया था।
मंदिर परिसर में सख्त नियम लागू
समिति की ओर से जानकारी दी गई है कि इस बार मंदिर परिसर में सख्त नियम लागू किए गए हैं। दर्शन क्षेत्र में व्यवस्था बनाए रखने के लिए मोबाइल फोन, फोटोग्राफी, वीडियो रिकॉर्डिंग, रील्स और व्लॉगिंग पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है। यह नियम मंदिर परिसर के लगभग 50 से 70 मीटर के दायरे में लागू रहेगा, जिसमें केदारनाथ का चबूतरा क्षेत्र भी शामिल है। यह प्रतिबंध सभी श्रद्धालुओं पर समान रूप से लागू होगा, चाहे वे आम भक्त हों, यूट्यूबर, ब्लॉगर या किसी विशेष अतिथि वर्ग से हों। अधिकारियों के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य भीड़ नियंत्रण, शांति बनाए रखना और मंदिर की पवित्रता को सुरक्षित रखना है।
श्रद्धालुओं के लिए लॉकर और क्लॉक रूम व्यवस्था
मंदिर परिसर के बाहर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए लॉकर और क्लॉक रूम बनाए गए हैं, जहां उन्हें अपने मोबाइल फोन और कैमरे जमा करने होंगे। नियमों का उल्लंघन करने पर मोबाइल जब्त किया जा सकता है और भारी जुर्माना भी लगाया जा सकता है। इसके लिए टोकन सिस्टम लागू रहेगा। श्रद्धालुओं को व्यवस्थित तरीके से बैच में दर्शन कराए जाएंगे, ताकि भीड़ को नियंत्रित रखा जा सके।
आधिकारिक वीआईपी को ही विशेष दर्शन की अनुमति
भीड़ प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए रेलिंग, सुरक्षा बलों और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है, जिससे अंतिम छोर पर खड़े भक्त भी आसानी से बाबा केदार के दर्शन कर सकें। ऑनलाइन पंजीकरण को अनिवार्य कर दिया गया है और पहले ही लाखों श्रद्धालु अपना रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं। वहीं VIP दर्शन व्यवस्था को भी सख्ती से नियंत्रित किया गया है। अब केवल सरकारी प्रोटोकॉल के तहत आने वाले आधिकारिक वीआईपी को ही विशेष दर्शन की अनुमति दी जाएगी।
