मार्च के महीने में मौसम का अलग ही मिजाज देखने को मिला है। जहां ऐसा लग रहा था कि जल्द ही गर्मी दस्तक देगी तो वहीं बारिश-आंधी ने सबको हैरान कर दिया। अब सवाल यह है महीने के आखिरी दिनों का और अप्रैल का मौसम कैसा रहेगा? बात अगर मौसम प्रणालियों की करें तो, एक ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण उत्तर-पश्चिमी राजस्थान और उसके आसपास के क्षेत्र में स्थित है, जो निचले ट्रोपोस्फेरिक स्तर तक फैला हुआ है। वहीं, उत्तर-पश्चिमी राजस्थान के ऊपर स्थित उपरोक्त चक्रवाती परिसंचरण से लेकर उत्तरी मध्य प्रदेश के मध्य भागों तक, निचले ट्रोपोस्फेरिक स्तर में एक द्रोणी फैली हुई है। बिहार से लेकर झारखंड होते हुए गंगा-तटीय पश्चिम बंगाल तक, निचले ट्रोपोस्फेरिक स्तर में एक द्रोणी फैली हुई है।
कल का मौसम 30 मार्च 2026
एक ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण उत्तरी ओडिशा और उसके आसपास के क्षेत्र में, निचले ट्रोपोस्फेरिक स्तर में स्थित है। उत्तरी ओडिशा के ऊपर स्थित उपरोक्त चक्रवाती परिसंचरण से लेकर दक्षिण छत्तीसगढ़, तेलंगाना और आंतरिक कर्नाटक होते हुए दक्षिण तमिलनाडु तक, निचले ट्रोपोस्फेरिक स्तर में एक द्रोणी/पवन विच्छिन्नता (Wind Discontinuity) फैली हुई है। एक ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण उत्तर-पूर्वी असम और उसके आसपास के क्षेत्र में, निचले ट्रोपोस्फेरिक स्तर में स्थित है। एक ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण रायलसीमा और उसके आसपास के क्षेत्र में, निचले ट्रोपोस्फेरिक स्तर में स्थित है। एक ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण दक्षिण आंतरिक कर्नाटक और उसके आसपास के क्षेत्र में, मध्य ट्रोपोस्फेरिक स्तर में स्थित है। उत्तरी भारत के ऊपर उपोष्णकटिबंधीय पछुआ जेट स्ट्रीम (Jet Stream) प्रभावी है, जिसकी मुख्य हवाओं की गति समुद्र तल से 12.6 किमी की ऊंचाई पर लगभग 80 नॉट्स है। एक नया पश्चिमी विक्षोभ 02 अप्रैल, 2026 से उत्तर-पश्चिमी भारत को प्रभावित कर सकता है।
जम्मू-कश्मीर से हिमाचल तक मौसम कैसा रहेगा?
30 मार्च और इसके बाद 2–3 अप्रैल के दौरान जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश और बर्फबारी की संभावना जताई गई है। वहीं, 30 मार्च और फिर 3–4 अप्रैल को हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भी ऐसे ही मौसम रहने के आसार हैं। इन इलाकों में कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ 30 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। इसके अलावा, 31 मार्च को पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कुछ इलाकों में बिखरी हुई हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। इन क्षेत्रों में भी गरज-चमक और तेज हवाओं की संभावना बनी हुई है। खासतौर से 30 मार्च को कश्मीर घाटी के कुछ स्थानों पर भारी बारिश और बर्फबारी हो सकती है। इसी दिन हिमाचल प्रदेश, पंजाब और पूर्वी राजस्थान के साथ-साथ उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में ओलावृष्टि होने की भी संभावना जताई गई है।
दिल्ली में कल का मौसम कैसा रहेगा
दिल्ली में कल मौसम का मिजाज बदलता हुआ नजर आएगा। सुबह के समय आसमान आंशिक रूप से बादलों से ढका रहेगा, लेकिन दोपहर तक बादल अधिक घने हो सकते हैं। दिन के दूसरे हिस्से, खासकर दोपहर से शाम के बीच, कहीं-कहीं गरज और बिजली के साथ हल्की बूंदाबांदी होने की संभावना है। तापमान की बात करें तो अधिकतम तापमान 28 से 30 डिग्री सेल्सियस के बीच और न्यूनतम तापमान 20 से 22 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है। न्यूनतम तापमान सामान्य से लगभग 1.6 से 3 डिग्री सेल्सियस अधिक रह सकता है, जबकि अधिकतम तापमान सामान्य से 1.6 से 3 डिग्री सेल्सियस तक कम रहने की संभावना है। हवा की दिशा मुख्य रूप से उत्तर-पूर्व रहेगी। सुबह के समय इसकी गति करीब 10 किमी प्रति घंटा तक हो सकती है। दोपहर में हवा की रफ्तार बढ़कर लगभग 15 किमी प्रति घंटा हो जाएगी और दिशा उत्तर की ओर हो सकती है। वहीं, शाम और रात के दौरान हवा की गति धीरे-धीरे बढ़ेगी, लेकिन यह 25 किमी प्रति घंटा से कम ही बनी रहेगी।
पूर्वोत्तर भारत के क्षेत्रों का मौसम
30 मार्च से 2 अप्रैल के बीच पूर्वोत्तर भारत के कई राज्यों में मौसम सक्रिय रहने के आसार हैं। इस दौरान असम और मेघालय में व्यापक क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है, जिसमें गरज-चमक और 30 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। वहीं, 31 मार्च के बीच नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भी कई स्थानों पर इसी तरह का मौसम देखने को मिल सकता है, जहां बारिश के साथ आंधी और बिजली चमकने की आशंका जताई गई है। इसी अवधि में अरुणाचल प्रदेश के कुछ इलाकों में भी बिजली चमकने की संभावना बनी हुई है। इसके अलावा, 30 मार्च से 1 अप्रैल के दौरान अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय के कुछ हिस्सों में भारी बारिश हो सकती है। वहीं 30 मार्च को नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा के अलग-अलग स्थानों पर भी तेज बारिश होने के आसार हैं, जिससे लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।
पूर्वी भारत में बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट
30 मार्च से 1 अप्रैल के बीच उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में व्यापक स्तर पर हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है। इस दौरान गरज-चमक, बिजली गिरने और 30 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। वहीं, 31 मार्च और 2 अप्रैल को झारखंड में भी इसी तरह का मौसम रहने के आसार हैं, जबकि ओडिशा में अगले पांच दिनों तक ऐसे हालात बने रह सकते हैं। 31 मार्च को गंगा के मैदानी पश्चिम बंगाल और बिहार के कुछ इलाकों में छिटपुट से लेकर बिखरी हुई बारिश हो सकती है। यहां गरज-चमक के साथ 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और झोंकों में इनकी गति 60 किमी प्रति घंटे तक पहुंचने की संभावना है। कुछ स्थानों पर हवाओं की रफ्तार 50 से 60 किमी प्रति घंटे तक, जबकि झोंकों में 70 किमी प्रति घंटे तक भी जा सकती है। इसके अलावा, 31 मार्च को उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम के कुछ हिस्सों में ओलावृष्टि के साथ भारी बारिश होने की भी संभावना जताई गई है।
मध्य प्रदेश और विदर्भ इलाकों में ऐसा रहेगा मौसम का हाल
30 मार्च से 2 अप्रैल के बीच मध्य प्रदेश और विदर्भ के विभिन्न इलाकों में गरज-चमक, बिजली गिरने और 30 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाओं के साथ हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। वहीं, छत्तीसगढ़ में अगले छह दिनों तक कुछ स्थानों पर इसी तरह का मौसम बने रहने की संभावना है। इसके अलावा, 30 मार्च को पश्चिमी मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में ओलावृष्टि हो सकती है। वहीं, 31 मार्च को विदर्भ और छत्तीसगढ़ के कुछ क्षेत्रों में भी ओले गिरने की संभावना जताई गई है।
मध्य महाराष्ट्र और आसपास के क्षेत्रों का मौसम
31 मार्च को मध्य महाराष्ट्र में तथा 30 मार्च से 2 अप्रैल के बीच मराठवाड़ा के कुछ इलाकों में गरज-चमक, बिजली गिरने और 30 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाओं (झोंकों में 60 किमी प्रति घंटे तक) के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने के आसार हैं। वहीं, गुजरात में 29 और 30 मार्च के साथ 2 अप्रैल को बिजली कड़कने की संभावना जताई गई है। इसके अलावा, कोंकण और गोवा में 31 मार्च से 2 अप्रैल के दौरान, तथा मध्य महाराष्ट्र में 1 और 2 अप्रैल को भी आकाशीय बिजली गिरने के संकेत हैं। इसके साथ ही, 30 और 31 मार्च को मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा के कुछ हिस्सों में ओलावृष्टि होने की भी संभावना है।
अधिकतम तापमान का पूर्वानुमान
उत्तर-पश्चिम भारत में 30 मार्च तक दिन के तापमान में लगभग 2 से 4 डिग्री सेल्सियस की धीरे-धीरे कमी आने की संभावना है। वहीं, मध्य भारत में 1 अप्रैल तक अधिकतम तापमान में कोई खास बदलाव होने के संकेत नहीं हैं, लेकिन 2 से 4 अप्रैल के दौरान इसमें 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आ सकती है। पूर्वी भारत की बात करें तो यहां 2 अप्रैल तक तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी होने की संभावना है, जबकि 3 और 4 अप्रैल को इसमें कोई विशेष परिवर्तन नहीं होगा। गुजरात में 1 अप्रैल तक अधिकतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की कमी आ सकती है, जिसके बाद 2 से 4 अप्रैल के बीच तापमान लगभग स्थिर रहने की उम्मीद है। इसी तरह, महाराष्ट्र में 30 मार्च तक तापमान में कोई खास बदलाव नहीं होगा, लेकिन 31 मार्च से 4 अप्रैल के दौरान इसमें 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट दर्ज की जा सकती है। देश के अन्य हिस्सों में फिलहाल अधिकतम तापमान में किसी बड़े बदलाव की संभावना नहीं जताई गई है।
FAQs
मार्च के अंत में मौसम में बदलाव क्यों देखने को मिल रहा है?
देशभर में सक्रिय विभिन्न मौसम प्रणालियों जैसे चक्रवाती परिसंचरण, द्रोणी और पश्चिमी विक्षोभ के कारण बारिश, आंधी और तापमान में उतार-चढ़ाव हो रहा है।
किन क्षेत्रों में बारिश और बर्फबारी की संभावना है?
उत्तर भारत के पहाड़ी क्षेत्रों जैसे जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में बारिश और बर्फबारी के आसार हैं, जबकि अन्य कई राज्यों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।
किन जगहों पर ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है?
कुछ क्षेत्रों जैसे मध्य प्रदेश, विदर्भ, छत्तीसगढ़ और मराठवाड़ा में अलग-अलग दिनों में ओले गिरने की आशंका है।
तापमान में किस तरह का बदलाव देखने को मिलेगा?
उत्तर-पश्चिम भारत में तापमान में गिरावट के बाद बढ़ोतरी हो सकती है, जबकि मध्य और पूर्वी भारत में अलग-अलग समय पर तापमान में उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा। देश के बाकी हिस्सों में तापमान सामान्य के आसपास रहने की संभावना है।
