Muzaffarnagar News: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में 23 मामलों में फांसी की सजा सुनाने के लिए चर्चा में रहे जज रवि कुमार दिवाकर की तैनाती में बदलाव किया गया है। अब तक फास्ट ट्रैक कोर्ट में जिम्मेदारी संभाल रहे दिवाकर को फैमिली कोर्ट में अपर प्रधान न्यायाधीश के पद पर नियुक्त किया गया है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने शुक्रवार को अधिसूचना जारी कर मुजफ्फरनगर के तीन न्यायिक अधिकारियों के कार्यक्षेत्र में फेरबदल किया। इस प्रशासनिक बदलाव के तहत अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश मंजुला भलोटिया को महिला अपराधों से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए गठित फास्ट ट्रैक कोर्ट की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश शिव कुमारी को 14वें वित्त आयोग के तहत स्थापित न्यायालय में तैनात किया गया है।
जज रवि कुमार दिवाकर (फोटो- ANI)
23 मामलों में मृत्युदंड का फैसला सुनाने वाले जज
इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश के तहत मुजफ्फरनगर में न्यायिक अधिकारियों की तैनाती में बदलाव किया गया है। इसके अनुसार, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश और फास्ट ट्रैक कोर्ट में तैनात रवि कुमार दिवाकर को परिवार न्यायालय, मुजफ्फरनगर में अपर प्रधान न्यायाधीश की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जिले में अपने कार्यकाल के दौरान 23 मामलों में मृत्युदंड का फैसला सुनाने के कारण वह चर्चा में रहे हैं।
मंजुला भलोटिया को फास्ट ट्रैक कोर्ट में नियुक्त किया गया
नई नियुक्ति के साथ उनकी न्यायिक जिम्मेदारी में भी बदलाव हुआ है। वहीं, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश मंजुला भलोटिया को फास्ट ट्रैक कोर्ट में नियुक्त किया गया है। उन्हें महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों से संबंधित मामलों की सुनवाई की जिम्मेदारी दी गई है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश शिव कुमारी को 14वें वित्त आयोग के तहत गठित न्यायालय में नई तैनाती दी गई है। इस पद पर वह न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर की जगह कार्यभार संभालेंगी।
हाई कोर्ट ने दिया क्या निर्देश?
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने तीनों न्यायिक अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे अपने मौजूदा पद का कार्यभार नियमानुसार सौंपने के बाद नई तैनाती वाले पद पर जिम्मेदारी ग्रहण करें। इसके साथ ही, कार्यभार सौंपने और नई जिम्मेदारी संभालने से संबंधित प्रमाणपत्र सहायक रजिस्ट्रार (सर्विसेज) को उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए हैं। ये प्रमाणपत्र भौतिक रूप से जमा करने के साथ आधिकारिक ईमेल के जरिए भी भेजने होंगे।
23वां मृत्युदंड का फैसला कौन सा था?
न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर मुजफ्फरनगर में अब तक 23 दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुना चुके हैं। सात सितंबर 2026 को उन्होंने दहेज उत्पीड़न के एक मामले में पत्नी को जलाकर हत्या करने के दोषी नदीम को फांसी की सजा सुनाई थी। यह उनके द्वारा मुजफ्फरनगर में सुनाया गया 23वां मृत्युदंड का फैसला था। इससे पहले बरेली समेत अन्य स्थानों पर तैनाती के दौरान भी वह 13 दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुना चुके हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, अपने पूरे न्यायिक सेवाकाल में रवि कुमार दिवाकर अब तक कुल 35 दोषियों को मृत्युदंड सुना चुके हैं।
