Janmashtami 2026 : आधी रात को कान्हा के जन्म के साथ ही मथुरा-वृंदावन समेत पूरे उत्तर प्रदेश में जन्माष्टमी का उल्लास जारी है। आधी रात श्रीकृष्ण जन्मस्थान में भक्तों ने जय कन्हैया लाल की के जयकारों के बीच भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया। इस खास अवसर पर मंदिर परिसर को ‘समुद्र मंथन’ की भव्य थीम से सजाया गया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र में आधी रात को जन्म हुआ। इसी परंपरा के चलते इस वर्ष 4 और 5 सितंबर की मध्यरात्रि में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया जा रहा है।
जन्माष्टमी का जश्न
कितने बजे होगा कृष्ण जन्म
जन्माष्टमी की रात कान्हा के जन्म का विशेष उत्सव ठीक 12 बजे मनाया गया। पंचांग के अनुसार नई दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में निशिता पूजा का शुभ मुहूर्त 4 सितंबर की रात 11:57 बजे से शुरू होकर 5 सितंबर को रात 12:43 बजे तक रहेगा। यानी श्रद्धालुओं को भगवान श्रीकृष्ण की जन्म पूजा और आराधना के लिए करीब 45 मिनट का शुभ समय मिलेगा। हालांकि अलग-अलग शहरों में स्थानीय पंचांग और भौगोलिक स्थिति के आधार पर शुभ मुहूर्त में कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है। इसलिए श्रद्धालुओं को अपने शहर के स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा का समय निर्धारित करने की सलाह दी जाती है।
श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा समिति के सचिव कपिल शर्मा ने बताया कि पूरे जन्मस्थान मंदिर परिसर को ’समुद्र मंथन’ की थीम पर सजाया गया है, जबकि मंदिर के अंदरूनी हिस्से को ’कलहंस राजहंस’ की थीम पर सजाया गया है। शर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री को भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े शंख ’पाञ्चजन्य’ की प्रतिकृति भेंट की गई। यह पंचरत्नी पोशाक में दर्शाए गए पांच बहुमूल्य रत्नों में से एक है।
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने द्वारकाधीश मंदिर में की पूजा
लखनऊ में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने चौक क्षेत्र स्थित श्री द्वारकाधीश मंदिर में पूजा-अर्चना की और राज्य तथा पूरे देश के लोगों की समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। जनभवन की ओर से जारी एक बयान के अनुसार, राज्यपाल ने मंदिर से जुड़े बच्चों और अन्य स्वयंसेवकों से भी बातचीत की तथा उनकी दिनचर्या, शिक्षा और भगवान की सेवा से जुड़े अनुभवों के बारे में जानकारी ली। वाराणसी के मंदिरों को भी जन्माष्टमी के लिए सजाया गया है। श्रद्धालु आधी रात से ही भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के अवसर पर होने वाले उत्सव की तैयारी में जुटे हैं।
आयोजकों ने बताया कि दुर्गाकुंड स्थित इस्कॉन मंदिर में रात 10 बजे से मध्यरात्रि तक विशेष महाभिषेक किया जाएगा। इसके लिए गंगाजल, दही, दूध तथा फलों और फूलों के रस समेत 51 सामग्री से विशेष मिश्रण तैयार किया गया है। महाभिषेक के बाद बाल स्वरूप भगवान श्रीकृष्ण ’लड्डू गोपाल’ को 108 प्रकार के व्यंजनों का विशेष भोग लगाया जाएगा। शहर के मंदिरों और अन्य स्थानों पर भगवान श्रीकृष्ण के जन्म से संबंधित झांकियां भी सजाई गई हैं।
इसके अलावा प्रयागराज, कानपुर, मेरठ, गोरखपुर, गाजियाबाद, सहारनपुर और आगरा समेत प्रदेश के विभिन्न शहरों में भी जन्माष्टमी की तैयारियां की गई हैं। श्रद्धालु सुबह से ही मंदिरों, विशेषकर भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित मंदिरों में दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। जन्माष्टमी भगवान विष्णु के अवतार माने जाने वाले भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का पर्व है। मथुरा-वृंदावन, गोकुल और अयोध्या समेत प्रमुख धार्मिक स्थलों पर रातभर उत्सव जारी रहेगा। इस अवसर पर मंदिरों में मध्यरात्रि पूजा, आरती और भक्ति कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
