Kashmir School Book Review: जम्मू-कश्मीर शिक्षा विभाग ने बच्चों की पढ़ाई और सामाजिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए एक बेहद अहम और बड़ा कदम उठाया है। स्कूल शिक्षा निदेशालय, कश्मीर ने घाटी में चल रहे सभी सरकारी स्कूलों, मान्यता प्राप्त प्राइवेट स्कूलों और कोचिंग सेंटरों को अपनी सभी किताबों की बारीकी से जांच करने का निर्देश दिया है।
शिक्षा विभाग ने दिए स्क्रीनिंग के निर्देश
इस नए आदेश के तहत सभी संस्था प्रमुखों (Kashmir Education Department) को जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे अपने परिसर में मौजूद हर एक किताब को खुद चेक करें। यह जांच सिर्फ स्कूल की लाइब्रेरी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि क्लासरूम, स्टाफ रूम, ऑफिस और हाल ही में खरीदी गई या पुरानी सभी किताबों पर लागू होगी।
क्यों लिया गया फैसला?
सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बच्चों के हाथ में ऐसी कोई भी किताब न आए जो उनके मानसिक विकास पर बुरा असर डाले। इस स्क्रीनिंग के जरिए उन किताबों को तुरंत हटाया जाएगा जिनमें:
- किसी भी समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली बातें हों।
- देशहित के खिलाफ या मौजूदा कानूनों का उल्लंघन करने वाली सामग्री हो।
- बच्चों की उम्र के हिसाब से गलत या अनुपयुक्त बातें लिखी हों।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के नियमों के तहत हो सामाग्री
इसके अलावा, सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि स्कूलों में पढ़ाई जाने वाली हर सामग्री 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020' के नियमों के मुताबिक होनी चाहिए। इस नीति में बच्चों को उनकी उम्र के हिसाब से सही और नैतिक शिक्षा देने पर जोर दिया गया है।
प्रशासन ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि किसी भी संस्थान की लापरवाही के कारण ऐसी कोई आपत्तिजनक सामग्री पाई जाती है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। विभाग का मानना है कि इस कदम से न केवल कश्मीर के शैक्षिक माहौल में सुधार होगा, बल्कि बच्चों को एक सुरक्षित और बेहतर भविष्य देने में मदद मिलेगी।
