जयपुर : राजस्थान में मेडिकल परीक्षा में फर्जीवाड़े का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां 2019 में MBBS की पढ़ाई कर रहे एक छात्र ने 60 लाख रुपये के लालच में आकर 2020 में अपने स्थान पर एक डमी कैंडिडेट से परीक्षा दिलवाई। डमी कैंडिडेट परीक्षा में पास भी हो गया और उसी नाम से जोधपुर AIIMS में MBBS में दाख़िला मिल गया। हैरानी की बात यह है कि वह फर्जी छात्र अब अपनी MBBS की पढ़ाई भी पूरी कर चुका था। लेकिन, डॉक्टर बनकर मरीजों की जान जोखिम में डालने से पहले ही यह फर्जीवाड़ा उजागर हो गया। पुलिस ने असली छात्र और डमी दोनों को गिरफ्तार कर लिया है।
(सांकेतिक फोटो)
60 लाख रुपये में किया सीट का सौदा
DCP वेस्ट जयपुर अमित कुमार ने बताया कि करीब 20 दिन पहले चोमू थाने में एक मामला दर्ज हुआ था। परिवादी ने शिकायत दी कि एक छात्र सचिन गोरा की जगह परीक्षा में कोई दूसरा व्यक्ति बैठा था। जांच में सामने आया कि अजीत गोरा नाम का व्यक्ति, जो अब जगन्नाथ पहाड़िया मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर के रूप में कार्यरत है, ने डमी बनकर परीक्षा दी थी। NTA और संबंधित संस्थाओं से रिपोर्ट मंगवाई गई, जिसमें प्रथम दृष्टि से यह प्रमाणित हुआ कि अजीत ने सचिन की जगह परीक्षा दी थी। इसके बदले अजीत को एक 60 लाख रुपये दिए गए थे। इस पूरे षड्यंत्र में चोमू निवासी डॉक्टर सुभाष सैनी का भी नाम सामने आया है, जिसने पैसे के लेनदेन में दलाल की भूमिका निभाई।
पुलिस ने सुभाष सैनी की आपराधिक पृष्ठभूमि की जांच की तो सामने आया कि वह 2013 में NEET UG परीक्षा में 65 लाख रुपये की धोखाधड़ी में शामिल रह चुका है और 5-6 बार गिरफ्तार हो चुका है। इस पूरे मामले में अभी तक तीन लोगों की पहचान हुई है – असली छात्र सचिन, डमी कैंडिडेट अजीत और दलाल सुभाष। फिलहाल, दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया है और तीसरे की तलाश जारी है। परीक्षा में अजीत की फोटो लगाई गई थी और सिग्नेचर जैसे कई तकनीकी गड़बड़ियों के आधार पर यह अपराध प्रमाणित पाया गया है।
DCP ने बताया कि आरोपियों को आठ दिन की पुलिस कस्टडी में लिया गया है। इस तरह का एक और मामला एक महीने पहले भी सामने आया था, जिसमें कर्नाटक से आए एक डॉक्टर को पैरामेडिकल परीक्षा में डमी के रूप में परीक्षा देते समय गिरफ्तार किया गया था। पुलिस और संबंधित एजेंसियां इस पूरे मामले की गोपनीयता रखते हुए गहराई से जांच कर रही हैं।
