Rajasthan: जोधपुर शहर की खास पहचान है ये मिठाई, इसके स्वाद की धमक विदेशों तक, जानिए इसके सफर की कहानी

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Mar 9, 2023, 06:09 PM IST

Rajasthan: सन 1920 के आसपास जोधपुर के निकट जाजीवाल गांव के कारीगर जयराम दास ने कचौरी की रेसिपी को गलती से बना दिया था, जिसमें कचौरी में नमकीन भरावन की जगह मीठा भर दिया था। जोधपुर की मावा कचौरी के मुरीद देश ही में नहीं बल्कि विदेशों तक हैं। यहां के रहवासियों के मुताबिक, पाकिस्तान के लोग भी यहां से मावा कचौरी मंगवाते हैं। इसके अलावा सिंगापुर, इंग्लैंड, खाड़ी देशों सहित कई देशों में इसे मंगवाया जाता है।

KEY HIGHLIGHTS
  • हलवाई ने गलती से कचौरी में नमकीन की जगह मीठा भर दिया था
  • सन 1920 में त्रिपोलिया बाजार में मावा कचौरी बननी शुरू हुई थी
  • आज दुनिया भर में लोग जोधपुर की मावा कचौरी के मुरीद हैं

Rajasthan: राजस्थान की पहचान यहां के किलों, महलों और शानदार हवेलियों के अलावा और भी है। प्रदेश के अलग- अलग हिस्सों में कई प्रकार के जायकेदार मिठाइयां और व्यंजनों की भरमार है। इसी कड़ी में आपको बताएंगे एक ऐसे लजीज व्यंजन के बारे में जिसे जानने के बाद आपका मुहं पानी से भर जाएगा। राजस्थान के पश्चिमी इलाके में रेगिस्तान व अरावली की सुरमयी वादियों के बीच बसा जोधपुर शहर।

Jodhapur Mava Kachouri

राजस्थान के जोधपुर की लजीज मावा कचौरी की धमक विदेशों तक (फाइल फोटो)

जिसे ब्लू और सन सिटी भी कहा जाता है। यहां पर बनती है एक ऐसी मिठाई जिसकी धमक देश ही नहीं बल्कि विदेशों तक है। कचौरी का नाम सुनते ही हींग की महक वाली या फिर आलू के मसाले से भी तीखी खुश्बू वाली नमकीन की तस्वीर आपके दिमाग में उभर जाती है। मगर, इसके अलावा कचौरी को बनाने का एक तरीका और भी है, जिसे मिठाई के तौर पर जोधपुर में बनाया जाता है। तो आइए जल्दी से जानते हैं जोधपुर में मावा कचौरी का इतिहास व इसे बनाने का तरीका।

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