जयपुर : पूर्व मेयर मुनेश गुर्जर को उनके तीसरे निलंबन मामले में राजस्थान हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। जस्टिस अनूप ढंड की अदालत ने गुर्जर की याचिका को खारिज करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह विभागीय जांच को समय पर पूरा करे। गुर्जर ने अपने निलंबन को चुनौती देते हुए कहा कि सरकार ने एकतरफा कार्रवाई की है और यह निर्णय राजनीतिक प्रेरणा से लिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें सुनवाई का मौका नहीं दिया गया।
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दूसरी ओर, सरकार ने कहा कि गुर्जर को निलंबन से पहले सुनवाई का पूरा अवसर दिया गया था, लेकिन उनके जवाब को असंतोषजनक पाया गया। गुर्जर के खिलाफ भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं, जिसके कारण उनका निलंबन उचित माना गया। गुर्जर ने यह भी बताया कि राज्य सरकार ने इस मामले में दो जांच अधिकारियों को नियुक्त किया है, लेकिन एक अधिकारी का कोई पत्र नहीं मिला और दूसरे अधिकारी के पत्र पर कोई हस्ताक्षर नहीं थे।
सुनवाई के लिए निर्धारित तारीख सार्वजनिक अवकाश पर थी, और जब उन्होंने अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए पत्र लिखा, तो उन्हें अगले दिन ही निलंबित कर दिया गया। गुर्जर का कार्यकाल लगभग 13 महीने का रहा है, जिसमें उन्हें तीन बार निलंबित किया गया। पहले दो निलंबन आदेशों को राजस्थान हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया था, जबकि वर्तमान सरकार ने उन्हें 23 सितंबर 2024 को निलंबित किया।
