Jaipur: ढूंढ नदी में फिर शुरू हुई जलधारा, अतिक्रमण की असलियत आई सामने; स्थानीय जनता बेहाल

जयपुर की पौराणिक ढूंढ नदी एक बार फिर कानोता बांध के छलकने से सुर्खियों में है। लगातार बढ़ रहे अतिक्रमण और घटते कैचमेंट एरिया ने इसके प्राकृतिक प्रवाह को बाधित कर दिया है। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यदि समय रहते समाधान नहीं हुआ, तो जल संकट और बाढ़ जैसी गंभीर समस्याएं सामने आ सकती हैं।

Jaipur News: राजधानी जयपुर की पौराणिक ढूंढ नदी में लगातार दूसरे वर्ष कानोता बांध के छलकने से पानी की आवक शुरू हो गई है। इस दौरान नदी में वर्षों से हो रहे अतिक्रमण उजागर हो गए हैं, जो इसकी पारिस्थिति की के लिए गंभीर खतरा बन चुके हैं। बीते 25 वर्षों में नदी का कैचमेंट एरिया 800 मीटर से घटकर मात्र 300 मीटर रह गया है। जलवायु परिवर्तन और तेजी से हो रहे शहरीकरण ने नदी के प्राकृतिक प्रवाह को बुरी तरह प्रभावित किया है।

Encroachment Threatens Historic Dhund River (Representative Photo: Canva)

अतिक्रमण से ऐतिहासिक धुंड नदी को खतरा (सांकेतिक फोटो: Canva)

जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) के मास्टर प्लान में भी इसके संरक्षण को लेकर कोई ठोस रणनीति नहीं दिखाई देती, जिससे स्थिति और अधिक चिंताजनक हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तत्काल कार्रवाई नहीं की गई, तो आने वाले समय में क्षेत्र को जल संकट और बाढ़ जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। अतिक्रमण के चलते जल निकासी में बाधा उत्पन्न हो रही है, जिससे स्थानीय निवासियों को भीषण समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में ज़रूरी है कि स्थानीय प्रशासन तत्काल प्रभाव से प्रभावी कदम उठाए, ताकि नदी का पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखा जा सके और भविष्य की आपदाओं से बचाव हो सके।

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