जयपुर : राजधानी के भांकरोटा इलाके में एक मकान को लेकर विवाद गहरा गया है। मामले में सामने आए दस्तावेजों और बाद में दर्ज कराई गई एफआईआर के बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं। फिलहाल पुलिस पूरे प्रकरण की जांच कर रही है और किसी भी पक्ष के दावों पर अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, 27 मार्च 2026 को आनंद सिंह और उनकी पत्नी ममता कंवर ने एक नोटराइज्ड समझौता पत्र, भुगतान की रसीद और पुलिस को दिए गए लिखित आवेदन के माध्यम से यह स्वीकार किया था कि उन्हें मकान के संबंध में कुल ₹11.25 लाख प्राप्त हो चुके हैं। इसमें ₹9.25 लाख नकद और ₹2 लाख का भारतीय स्टेट बैंक (SBI) का चेक शामिल था।
(सांकेतिक फोटो-Istock)
दस्तावेजों में यह भी उल्लेख है कि दोनों मकान खाली कर दूसरे स्थान पर चले जाएंगे और भविष्य में संबंधित संपत्ति पर किसी प्रकार का दावा नहीं करेंगे। इसके अलावा भांकरोटा थाना प्रभारी को दिए गए एक लिखित आवेदन में भी उन्होंने स्वेच्छा से मकान खाली करने, अपना सामान साथ ले जाने और संपत्ति को उसी स्थिति में सौंपने की बात कही थी। हालांकि, इसके बाद विवाद ने नया मोड़ ले लिया। ममता कंवर ने अदालत का दरवाजा खटखटाया, जिसके निर्देश पर रणवीर चौधरी और अन्य लोगों के खिलाफ घर में घुसकर मारपीट, धमकी देने और महिला के साथ अभद्रता सहित विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई।
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रणवीर चौधरी का आरोप है कि ममता कंवर और आनंद सिंह ने पहले ₹11.25 लाख लेकर मकान खाली करने पर सहमति दी, लेकिन बाद में समझौते का पालन नहीं किया और कब्जा भी बरकरार रखा। उनका यह भी आरोप है कि आपराधिक मामला दर्ज कराकर उन पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है।
एफआईआर में क्या हैं आरोप
दूसरी ओर, एफआईआर में ममता कंवर ने रणवीर चौधरी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इन आरोपों की जांच पुलिस कर रही है और अभी किसी अदालत ने मामले के तथ्यों पर अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। जांच के दौरान समझौता पत्र, भुगतान की रसीद, पुलिस को दिया गया आवेदन और एफआईआर, सभी दस्तावेजों की सत्यता, परिस्थितियों और कानूनी प्रभाव की जांच की जाएगी।
दूसरी ओर, रणवीर चौधरी का आरोप है कि आनंद सिंह और ममता कंवर ने ₹11.25 लाख की राशि लेने के बावजूद समझौते की शर्तों का पालन नहीं किया, मकान खाली नहीं किया और बाद में उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कराकर दबाव बनाने का प्रयास किया।
वहीं, एफआईआर में ममता कंवर ने रणवीर चौधरी और अन्य के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं। इन आरोपों की सत्यता की जांच पुलिस कर रही है। अभी तक किसी भी अदालत ने मामले के तथ्यों या दोनों पक्षों के दावों पर कोई अंतिम निर्णय नहीं दिया है।
पुलिस जांच के दौरान नोटराइज्ड समझौता पत्र, भुगतान की रसीद, थाना प्रभारी को दिए गए आवेदन, एफआईआर और अन्य उपलब्ध दस्तावेजों की प्रामाणिकता, परिस्थितियों तथा उनके कानूनी प्रभाव का परीक्षण करेगी। जांच पूरी होने के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
