अगर आपको लगता है कि इस बार मानसून सूना चला गया। बारिश नहीं हो रही है। शहर हों या ग्रामीण इलाके, लोग बारिश को तरस रहे हैं और गर्मी से बेहाल हैं, तो आपके लिए खुशखबरी है। मानसूनी बारिश को लेकर ISRO के वैदर Satellite से मिली ताजा तस्वीरे बहुत ही शानदार हैं। यह तस्वीरें देश में एक्टिव मानसून की ताकत को साफ तौर पर दिखाती हैं। अरब सागर से बंगाल की खाड़ी तक फैली बादलों की विशाल परत के चलते इस समय देश का लगभग 90 फीसद हिस्सा बादलों से ढका हुआ है। हालांकि, दो-तीन दिन पहले तक यह आंकड़ा लगभग 95 फीसद तक पहुंच गया था, जो इस मानसून सीजन के सबसे बड़े क्लाउड कवर में से एक माना जा रहा है। भले ही बादलों का दायरा थोड़ा कम हुआ है, लेकिन IMD का कहना है कि बारिश का दौर अभी थमने वाला नहीं है।
देश के ऊपर बादलों की सफेद चादर, कहां होगी मूसलाधार और कहां पड़ेगा सूखा
क्लाउड कवर कम हुआ, भारी बारिश का खतरा बरकरार
INSAT-3DR और INSAT-3DS सैटेलाइट्स की थर्मल इंफ्रारेड और वाटर वेपर इमेज के मुताबिक 21-22 जुलाई के दौरान देश का लगभग 95 फीसद हिस्सा बादलों से ढका हुआ था। ताजा तस्वीरों पर गौर करें तो यह दायरा घटकर लगभग 88-92 फीसद के बीच है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि यह कमी इस बात का संकेत कतई नहीं है कि मौसम में सुधार होगा और बारिश कम होगी।
बंगाल की खाड़ी में बना सिस्टम ला रहा बारिश
IMD के मुताबिक उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और पश्चिम बंगाल तट के पास बना निम्न दबाव का क्षेत्र (Low Pressure Area) लगातार एक्टिव है। IMD के अनुसार अगले दो से तीन दिनों में इसके और मजबूत होने की पूरी संभावना है। इसके साथ ही मानसून ट्रफ भी अपनी सामान्य स्थिति से दक्षिण की ओर बनी हुई है। यही कारण है कि पूर्वी, मध्य और उत्तरी भारत में लगातार नमी पहुंच रही है। इसी के साथ मानसून की गतिविधियां बनी हुई हैं, बारिश का दौर जारी है। बता दें कि जब आसमान में बादलों की मोटाई (Cloud Top Brightness Temperature) बहुत कम तापमान (माइनस 60 से माइनस 80 डिग्री सेल्सियस) तक गिर जाती है, तो वे ऊंचे तूफान के स्तंभ बनाते हैं और यही भारी बारिश का संकेत भी होते हैं। इस समय यही स्थिति मध्य और पूर्वी भारत में बनी हुई है।
इन राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश की आशंका
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार अगले कुछ दिनों में इस मौसमी गतिविधि का सबसे ज्यादा असर ओडिशा में देखने को मिलेगा। ओडिशा के कई इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा ओडिशा के पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़, पूर्वी मध्य प्रदेश, झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर भारत के कई राज्यों में खूब बारिश की संभावना बनी हुई है।
पहाड़ी इलाकों में लैंडस्लाइड और फ्लैश फ्लड का खतरा
वहीं उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में जुलाई के अंत तक रुक-रुककर बारिश जारी रहने के आसार हैं। पर्वतीय इलाकों में भारी बारिश के कारण लैंडस्लाइड, अचानक बाढ़ (Flash Flood) और सड़क बाधित (Road Block) होने का खतरा बना रह सकता है। पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी 31 जुलाई तक बारिश का दौर जारी रहेगा। कोंकण, गोवा और मध्य महाराष्ट्र के घाट क्षेत्रों में भी इस दौरान मानसूनी हवाओं की तीव्रता के कारण भारी वर्षा की चेतावनी है।
सेंट्रल इंडिया में बारिश से खरीफ फसलों को होगा लाभ
मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्सों, विदर्भ और आसपास के इलाकों में इस दौरान अच्छी बारिश का दौर जारी रहने की पूरी संभावना है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यह बारिश खरीफ फसलों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। हालांकि, लगातार बारिश वाले क्षेत्रों में जलभराव से फसलों को नुकसान का खतरा भी रहेगा।
मानसूनी बूंदों को तरसेंगे ये इलाके
IMD के अनुसार दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में तमिलनाडु, रायलसीमा, आंतरिक कर्नाटक के साथ ही प्रायद्वीप के अन्य हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक सिर्फ छिटपुट से हल्की बारिश ही होगी। यहां फिलहाल व्यापक या लगातार बारिश के कोई संकेत नहीं हैं।
22 जुलाई की इसरो की सैटेलाइट इमेज
यहां भी बारिश की बूंदों को तरसेगी धरती
यही नहीं पश्चिमी राजस्थान का रेगिस्तानी क्षेत्र भी देश के उन चुनिंदा हिस्सों में शामिल रहेगा, जहां बादलों की मौजूदगी कम रहेगी और भारी बारिश की संभावना न के बराबर है। हालांकि, कहीं-कहीं स्थानीय स्तर पर हल्की बारिश हो सकती है।
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क्या पूरे देश में बारिश होगी?
विशेषज्ञों का कहना है कि पूरे देश के ऊपर बादलों की चादर होने का यह मतलब नहीं कि हर जगह एक जैसी बारिश होगी। बारिश की तीव्रता इस बात पर निर्भर करती है कि मानसून ट्रफ, निम्न दबाव का क्षेत्र, समुद्री नमी और स्थानीय हवाएं किस क्षेत्र में सबसे ज्यादा एक्टिव हैं। यही कारण है कि एक ही समय में देश के कुछ हिस्सों में मूसलाधार बारिश होती है, जबकि अन्य हिस्सों में सिर्फ बादल छाए रहते हैं।
फिलहाल मौसम के हालात को देखते हुए पूर्वी, मध्य और हिमालयी राज्यों में लोगों को भारी बारिश से जुड़ी चेतावनियों पर खास ध्यान देने की सलाह दी गई है। दक्षिणी प्रायद्वीपीय और पश्चिमी राजस्थान के अधिकांश हिस्सों में महीने के अंत तक मौसम सूखा रहने और बारिश न के बराबर होने की संभावना है।
